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धनंजय और अभय सिंह की दोस्ती से लेकर दुश्मनी तक पूरी कहानी जान लीजिए

पूर्वांचल के दो बाहुबली नेताओं धनंजय सिंह और अभय सिंह की दोस्ती और दुश्मनी की पूरी कहानी. जानें 2002 के उस हमले के बारे में जिस पर 24 साल बाद वाराणसी कोर्ट का फैसला आने वाला है.

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पूर्वांचल की सियासत में सत्ता का मतलब सिर्फ कुर्सी नहीं, बल्कि रसूख, वर्चस्व और वजूद की लड़ाई होती है. इसी सियासी रणभूमि की सबसे चर्चित और रोंगटे खड़े कर देने वाली दास्तां है धनंजय सिंह और अभय सिंह की. ये दो वो नाम हैं, जो कभी दोस्ती की मिसाल हुआ करते थे, लेकिन आज एक-दूसरे के खून के प्यासे हैं. 90 के दशक में छात्र राजनीति के उबलते दौर में धनंजय और अभय की जोड़ी पूर्वांचल में एक ताकतवर गठजोड़ बनकर उभरी थी. तब लोग कहते थे कि अगर एक खड़ा है, तो दूसरा उसकी ढाल बनकर पीछे मौजूद है. लेकिन वक्त बदला और महत्वाकांक्षाओं की जंग में यह अटूट भरोसा गहरी नफरत में तब्दील हो गया.