कांशीराम की पुण्यतिथि विशेष: जानें उस ‘संन्यासी’ की कहानी, जिसने बदल दी भारत की सियासत
उपेक्षा की चोट से व्यथित इस सन्यासी ने न केवल आरक्षित कोटे से मिली नौकरी छोड़ दी बल्कि आजीवन कुंवारा रहकर गांव-परिवार-रिश्तेदार सभी का त्याग…
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उपेक्षा की चोट से व्यथित इस सन्यासी ने न केवल आरक्षित कोटे से मिली नौकरी छोड़ दी बल्कि आजीवन कुंवारा रहकर गांव-परिवार-रिश्तेदार सभी का त्याग कर दलितों के उत्थान के लिए जीवन समर्पित कर देने का वादा किया. अपनी मां को भेजे 24 पन्नों के खत में उन्होंने कहा कि वे अब सन्यास ले रहे हैं. हम बात कर रहे हैं बसपा के संस्थापक कांशीराम की.