शुरू हो चुका है सूर्य ग्रहण, 64 साल बाद बन रहे इस दुर्लभ संयोग से इन राशियों को मिलेगा बंपर फायदा
आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है जिसे वैज्ञानिक 'रिंग ऑफ फायर' कह रहे हैं. दोपहर 3:26 से शुरू हुआ यह ग्रहण शाम 7:57 तक रहेगा. 64 साल बाद कुंभ राशि में सूर्य-राहु की युति से दुर्लभ चतुर्ग्रही योग बन रहा है.
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आज साल का पहला सूर्य ग्रहण लग चुका है. विज्ञान की भाषा में इसे रिंग ऑफ फायर' कहा जा रहा है जिसमें चंद्रमा सूर्य को पूरी तरह नहीं ढक पाता और सूर्य एक चमकदार अंगूठी की तरह दिखाई देता है. यह वलयाकार और कंकड़ाकृति ग्रहण खगोलीय दृष्टि से बेहद खास है.

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पंडित राज मिश्रा के अनुसार, भारतीय समयानुसार यह सूर्य ग्रहण दोपहर 3:26 बजे शुरू हो चुका है और शाम 7:57 बजे समाप्त होगा. ग्रहण की कुल अवधि लगभग 4 घंटे 32 मिनट की रहेगी.

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भारत के लोगों के लिए महत्वपूर्ण अपडेट यह है कि यह सूर्य ग्रहण भारत में दिखाई नहीं देगा. चूंकि यह यहां दृश्यमान नहीं है इसलिए धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भारत में इसका सूतक काल मान्य नहीं होगा. आप बिना किसी भय के अपने दैनिक कार्य कर सकते हैं.

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ज्योतिष गणना के अनुसार, यह ग्रहण कुंभ राशि और धनिष्ठा नक्षत्र में लग रहा है. खास बात यह है कि 64 साल बाद कुंभ राशि में सूर्य और राहु एक साथ विराजमान हैं जिससे एक शक्तिशाली 'चतुर्ग्रही योग' बन रहा है. यह एक अत्यंत दुर्लभ और प्रभावशाली ज्योतिषीय घटना है.

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इस समय मंगल अपनी उच्च अवस्था में गोचर कर रहे हैं जो साहस और निर्णय क्षमता को बढ़ाएंगे. वहीं देवगुरु बृहस्पति 12 साल बाद अपनी उच्च राशि में प्रवेश करने जा रहे हैं. वे मिथुन से होते हुए कर्क और फिर सिंह राशि की ओर बढ़ेंगे जो वैश्विक स्तर पर बड़े बदलाव के संकेत हैं.

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भले ही ग्रहण भारत में न दिखे लेकिन नकारात्मक ऊर्जा से बचने के लिए ग्रहण काल में 'ऊं सूर्याय नमः' या 'आदित्य हृदय स्तोत्र' का पाठ करना चाहिए. इससे मानसिक शांति मिलती है और आत्मबल मजबूत होता है.

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परंपरा के अनुसार ग्रहण खत्म होने के बाद दान करना बहुत फलदायी होता है. विशेष रूप से गरीबों को गेहूं, गुड़ और तांबे का दान करें. इसके अलावा, स्नान के पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करने से नकारात्मकता दूर होती है और पवित्रता आती है.

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जब चंद्रमा पृथ्वी से अपनी अधिकतम दूरी पर होता है तो वह सूर्य के मध्य भाग को ही ढक पाता है. ऐसे में सूर्य का बाहरी हिस्सा एक चमकदार छल्ले की तरह दिखता है. इसी दुर्लभ दृश्य को 'रिंग ऑफ फायर' कहा जाता है जिसे देखने के लिए दुनिया भर के वैज्ञानिक उत्साहित रहते हैं.











