उत्तर प्रदेश विधानसभा में समाजवादी पार्टी के विधायक पंकज मलिक ने गन्ना मिलों और कारखानों में काम करने वाले श्रमिकों (मजदूरों) के शोषण और उनके वेतन में विसंगति के मुद्दे पर सरकार को जमकर घेरा. पंकज मलिक ने आरोप लगाया कि शुगर मिलों में वेज बोर्ड के अनुसार वेतन नहीं दिया जा रहा है. उन्होंने बताया कि 2022 की अधिसूचना के अनुसार न्यूनतम मासिक मजदूरी 25,000 से 26,000 रुपये के बीच होनी चाहिए, लेकिन मिलों में मजदूरों को मात्र 4,000 से 15,000 रुपये देकर निपटाया जा रहा है. उन्होंने पश्चिमी उत्तर प्रदेश की कई मिलों (जैसे शामली, खतौली, देवबंद आदि) का नाम लेकर कहा कि वहां मजदूरों का शोषण हो रहा है.
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पहचान पत्र और दस्तावेजी कमी
विधायक ने गंभीर आरोप लगाया कि मिलों में मजदूरों को आई-कार्ड, टोकन या वेतन पर्ची नहीं दी जाती है ताकि रिकॉर्ड को छिपाया जा सके और किसी दुर्घटना की स्थिति में जिम्मेदारी से बचा जा सके. उन्होंने कहा कि 'कैप' प्रपत्र (Form CAP) नहीं भरा जाता, जिससे मजदूरों की श्रेणी और काम का रिकॉर्ड गायब रहता है. उन्होंने सदन में कहा कि पुराने कर्मचारियों को तो फिर भी कुछ मिल रहा है, लेकिन नए और सीजनल (मौसमी) कर्मचारियों की स्थिति बहुत खराब है और उनके हाथ में 'कटोरा' देने जैसी स्थिति पैदा कर दी गई है. स्थायी आदेशों और सेवा शर्तों का खुला उल्लंघन किया जा रहा है.
पंकज मलिक ने सरकार से अपील की कि वह केवल भाषणों तक सीमित न रहे और इन आरोपों की जांच के लिए विधायकों की एक समिति बनाए. उन्होंने कहा कि अगर मंत्री जी थोड़ा सा दबाव बनाएं, तो मजदूरों का कल्याण हो सकता है, जैसा कि उनके पिछले प्रयासों से वेतन में कुछ सुधार हुआ था.
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