उत्तर प्रदेश की राजनीति में करणी सेना, मायावती और ठाकुर वोटों के समीकरण को लेकर नई बहस छिड़ गई है. करणी सेना ने यूजीसी (UGC) के नए नियमों को सवर्ण विरोधी बताते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. इस बीच करणी सेना के अध्यक्ष राज सिंह शेखावत ने मायावती की तारीफ करते हुए उन्हें "राजा" बताया, क्योंकि मायावती ने यूजीसी नियमों के खिलाफ खुलकर स्टैंड लिया है.
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शेखावत का कहना है कि जो हमारा साथ देगा, हम उसके साथ रहेंगे और जो सवर्णों के खिलाफ जाएगा, उसे सत्ता से उखाड़ फेंकेंगे.
क्या ठाकुर वोट मायावती की ओर खिसकेंगे?
2024 के लोकसभा चुनाव में राजपूतों की नाराजगी की खबरों के बावजूद, CSDS के डेटा के अनुसार उत्तर प्रदेश में 89% राजपूतों ने भाजपा को वोट दिया, जो 2019 (82%) से अधिक था. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की हिंदुत्व वाली छवि और बड़े राजपूत चेहरे के कारण इस वोट बैंक में किसी बड़े बिखराव की संभावना फिलहाल कम दिखती है.
इस बीच यूपी में डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक भी चर्चा में हैं. ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के साथ माघ मेले में हुए दुर्व्यवहार (बटुकों की शिखा खींचने) पर डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने कड़ा ऐतराज जताया है. उन्होंने कहा कि पुलिस को बल प्रयोग करना था तो लाठी का उपयोग करती, लेकिन शिखा खींचना महापाप है और ऐसा करने वालों को इसका फल भुगतना पड़ेगा.
वहीं, सीएम योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में स्पष्ट किया था कि किसी को भी मर्यादाओं का उल्लंघन कर व्यवस्था बिगाड़ने की अनुमति नहीं दी जा सकती.
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