करछना विधानसभा 2027: क्या रेवती रमण सिंह का परिवार बचा पाएगा अपना 40 साल पुराना किला?

Karchhana Assembly 2027: प्रयागराज की करछना सीट पर क्या फिर चलेगा रेवती रमण सिंह के परिवार का जादू? जानिए 2027 के चुनावों के लिए यहाँ के जातीय समीकरण और भाजपा बनाम सपा-कांग्रेस की जंग की पूरी कहानी.

रजत सिंह

• 12:01 PM • 18 Feb 2026

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प्रयागराज की करछना विधानसभा सीट हमेशा से रेवती रमण सिंह और उनके परिवार के वर्चस्व के लिए जानी जाती रही है. 2027 के विधानसभा चुनावों को लेकर यहां की सियासी सरगर्मी अभी से तेज हो गई है. 

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रेवती रमण सिंह का सियासी इतिहास

रेवती रमण सिंह समाजवादी पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक रहे हैं. वे इस सीट से आठ बार विधायक और सांसद रह चुके हैं. उन्होंने ही दिग्गज भाजपा नेता मुरली मनोहर जोशी को इलाहाबाद लोकसभा सीट पर शिकस्त दी थी. वर्तमान में उनके बेटे उज्ज्वल रमण सिंह इलाहाबाद से कांग्रेस के सांसद हैं. 

2022 के नतीजे और वर्तमान स्थिति

2022 में यह सीट भाजपा-निषाद पार्टी गठबंधन के पीयूष रंजन निषाद ने जीती थी, जिन्होंने उज्ज्वल रमण सिंह को करीब 10,000 वोटों से हराया था. हालांकि, 2024 के लोकसभा चुनावों में इसी विधानसभा क्षेत्र से विपक्षी गठबंधन को भाजपा पर लगभग 19,000 वोटों की बढ़त मिली है, जिससे सपा-कांग्रेस गठबंधन उत्साहित है. 

जातीय समीकरण (अनुमानित आंकड़े)

करछना सीट पर जातीय समीकरण जीत-हार में बड़ी भूमिका निभाते हैं: 

  • निषाद: 55,000 (सबसे प्रभावशाली वोट बैंक)
  • मुस्लिम: 50,000
  • कुर्मी: 45,000
  • ब्राह्मण: 35,000
  • यादव/पासी/भूमिहार: 25,000-25,000 प्रत्येक

2027 की चुनौतियां

भाजपा का पक्ष: विधायक पीयूष रंजन निषाद विकास और सुशासन के दम पर दोबारा कमल खिलने का दावा कर रहे हैं. 

सपा-कांग्रेस गठबंधन: अखिलेश यादव के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फार्मूले और लोकसभा में मिली बढ़त के सहारे विपक्षी खेमा वापसी की उम्मीद कर रहा है. 

उम्मीदवारी: चर्चा है कि उज्ज्वल रमण सिंह के सांसद बनने के बाद उनके परिवार से उनकी पत्नी या कोई अन्य सदस्य चुनाव लड़ सकता है.