उत्तर प्रदेश में शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद के अपमान का मुद्दा अब सीएम योगी आदित्यनाथ के निजी पहनावे और धार्मिक पहचान पर छिड़ी जंग में बदल गया है. सपा प्रमुख अखिलेश यादव द्वारा दिए गए एक हालिया बयान ने इस मामले को और तूल दे दिया है. उन्नाव में एक कार्यक्रम के दौरान अखिलेश यादव ने कहा कि भगवा वस्त्र पहनने और कान छिदवाने से कोई योगी नहीं हो जाता. उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम योगी आदित्यनाथ ने शंकराचार्य को गंगा स्नान करने से रोककर बहुत बड़ा 'पाप' किया है, जिसके लिए उन्हें सजा भुगतनी पड़ेगी. अखिलेश यादव ने कहा कि योगी आदित्यनाथ खुद का सर्टिफिकेट दिखाएं कि वे योगी हैं या नहीं, वे कैसे तय कर सकते हैं कि अविमुक्तेश्वरानंद शंकराचार्य हैं या नहीं.
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अखिलेश के बयान पर भड़के जितेंद्रनांद सरस्वती
इस बीच अखिल भारतीय संत समिति के स्वामी जितेंद्रानंद सरस्वती ने अखिलेश के बयान पर भड़कते हुए कहा कि वे राजनीति जरूर करें लेकिन भाषाई मर्यादा का ध्यान रखें. उन्होंने कहा कि योगी आदित्यनाथ को अखिलेश से सर्टिफिकेट की जरूरत नहीं है. स्वामी जितेंद्रानंद ने अखिलेश को घेरते हुए कहा कि वे अपने पिता की 'वसीयत और विरासत' पर राजनीति कर रहे हैं, जबकि योगी आदित्यनाथ नाथ पंथ की गोरक्षनाथ पीठ की तीसरी पीढ़ी के साधक और नेता हैं.
स्वामी जितेंद्रानंद ने अविमुक्तेश्वरानंद के 'शंकराचार्य' टाइटल पर भी सवाल उठाया. उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट में ज्योतिष पीठ का टाइटल सूट अभी लंबित है और उनके अभिषेक पर भी कानूनी रोक लगी हुई है. ऐसे में अखिलेश का उनका समर्थन करना 'कानून का उल्लंघन' है.
जानिए इस विवाद की पृष्ठभूमि
यह पूरा विवाद 18 जनवरी (मौनी अमावस्या) को शुरू हुआ, जब आरोप लगाया गया कि पुलिस ने शंकराचार्य को पालकी से स्नान के लिए जाने से रोका और उनके समर्थकों (संतों-बटुकों) के साथ मारपीट की. पिछले दिनों मुख्यमंत्री योगी ने सदन में कहा था कि कोई भी वातावरण खराब करने के लिए 'शंकराचार्य' पद का दुरुपयोग नहीं कर सकता और मर्यादाओं का पालन अनिवार्य है.
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