फिल्म 'यादव जी की लव स्टोरी' को लेकर उत्तर प्रदेश के इटावा में यादव समाज और समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ताओं में भारी रोष है. इटावा में सपा कार्यालय पर जुटे पदाधिकारियों और समाज के लोगों ने इस फिल्म के टाइटल और उद्देश्य पर गंभीर सवाल उठाए हैं. देखिए इटावा से 'यूपी Tak' की ग्राउंड रिपोर्ट, हमारी खास पेशकश 'यूपी की राय'.
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फिल्म के टाइटल पर कड़ा विरोध
समाज के लोगों का कहना है कि फिल्म का नाम किसी विशेष जाति पर रखना समाज में विभाजन और जातिवाद को बढ़ावा देना है. सपा लोहिया वाहिनी के जिला अध्यक्ष किशन यादव ने कहा कि ऐसी फिल्में समाज को मार्गदर्शन देने के बजाय बंटवारा करती हैं. उन्होंने सुझाव दिया कि यदि फिल्में बनानी ही हैं, तो समाज के ज्वलंत मुद्दों पर बनाई जाएं.
समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता विक्की गुप्ता ने संसर बोर्ड की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए कहा कि 'यादव जी की लव स्टोरी' और 'घूसखोर पंडित' जैसी फिल्मों को मंजूरी कैसे मिल जाती है? उनका आरोप है कि यह एक सोची-समझी रणनीति के तहत समाज को हिंदू-मुस्लिम और विभिन्न जातियों में लड़ाने की कोशिश है.
सपा के पिछड़ा वर्ग प्रदेश सचिव राकेश यादव ने कहा कि फिल्मों को हमेशा से समाज का आईना माना गया है, लेकिन अब इन्हें राजनीतिक प्रश्रय मिल रहा है ताकि समाज में विभेद पैदा किया जा सके. कार्यकर्ताओं का मानना है कि 'पद्मावत' से लेकर अब तक कई ऐसी फिल्में आई हैं जिनसे देश और प्रदेश का माहौल बिगड़ा है.
फिल्म की कहानी पर आपत्ति
फिल्म में यादव समाज के युवक और मुस्लिम युवती की प्रेम कहानी दिखाई गई है, जिस पर कार्यकर्ताओं का कहना है कि यह केवल दंगा और फसाद की मंशा से बनाई गई फिल्म प्रतीत होती है. सपा नेत्री मालती यादव ने कहा कि ऐसी फिल्मों के बजाय युवाओं को प्रेरित करने वाली और ज्ञान बढ़ाने वाली फिल्में बनाई जानी चाहिए.
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