Katehari Election 2027: उत्तर प्रदेश की सियासत में अंबेडकरनगर जिले की कटहरी विधानसभा सीट हमेशा से चर्चा के केंद्र में रही है. यहां का राजनीतिक मिजाज बेहद दिलचस्प है, जहां की जनता ने हर चुनाव में अलग-अलग दलों पर अपना भरोसा जताया है. 2024 के लोकसभा चुनाव के बाद जब इस सीट पर उपचुनाव हुआ तो बीजेपी के धर्मराज निषाद ने सपा के कद्दावर नेता लालजी वर्मा की पत्नी शोभा वर्मा को हराकर सभी को चौंका दिया. इस जीत के बाद सपा ने सरकार और प्रशासन पर धांधली का आरोप लगाया तो वहीं बीजेपी ने इसे विकास और संगठन की जीत करार दिया. अब सवाल यह है कि क्या 2027 के यूपी विधानसभा चुनाव में बीजेपी अपनी इस जीत को बरकरार रख पाएगी या फिर लालजी वर्मा के सियासी रसूख के दम पर समाजवादी पार्टी साइकिल की रफ्तार दोबारा बढ़ाएगी?
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कटहरी सीट का चुनावी इतिहास
कटहरी विधानसभा का इतिहास गवाह है कि यहां कोई भी पार्टी इसे अपना स्थायी किला नहीं कह सकती.
2007: बीएसपी के धर्मराज निषाद ने सपा के जयशंकर पांडे को हराया.
2012: सपा के शंखलाल मांझी ने बीएसपी के लालजी वर्मा को मात दी.
2017: बीजेपी की प्रचंड लहर के बावजूद बीएसपी के टिकट पर लालजी वर्मा ने जीत हासिल की.
2022: लालजी वर्मा सपा में शामिल हुए और साइकिल के निशान पर फिर चुनाव जीते.
2024 (उपचुनाव): लालजी वर्मा के सांसद बनने के बाद यह सीट खाली हुई. इसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी के धर्मराज निषाद ने सपा की शोभा वर्मा (लालजी वर्मा की पत्नी) को हराकर कमल खिलाया.
क्या हैं कटहरी के सबसे बड़े मुद्दे?
मुख्य रूप से ग्रामीण पृष्ठभूमि वाली इस विधानसभा की अर्थव्यवस्था खेती पर टिकी है. अकबरपुर चीनी मिल होने की वजह से यहां गन्ने की खेती बड़े पैमाने पर होती है. ऐसे में किसानों के लिए छोटा पशु (आवारा पशु), सिंचाई और गन्ना मूल्य भुगतान हमेशा से चुनाव के मुख्य मुद्दे रहे हैं. इसके अलावा बेरोजगारी, महंगाई और स्थानीय सड़कों का विकास भी राजनीतिक चर्चाओं के केंद्र में रहता है.
जातीय समीकरण: किसका पलड़ा भारी?
कटहरी में लगभग 3.51 लाख कुल मतदाता हैं. सामाजिक समीकरणों की बात करें, तो यहां अनुसूचित जाति (दलित) और ब्राह्मण वोटर सबसे निर्णायक भूमिका निभाते हैं.
अनुसूचित जाति (SC): 85,000
ब्राह्मण: 55,000
कुर्मी (पटेल): 45,000
मुस्लिम: 40,000
निषाद: 35,000
ठाकुर (क्षत्रिय): 30,000
यादव: 22,000
वैश्य: 15,000
अन्य (नाई, कहार, चौहान, पाल, विश्वकर्मा आदि): 30,000+
बीजेपी विधायक का दावा: 'सड़कों का जाल बिछाया, लाइटों से चमकाया गांव'
कटहरी से बीजेपी विधायक धर्मराज निषाद ने अपने कार्यकाल के विकास कार्यों का ब्योरा देते हुए कहा 'बाय-इलेक्शन में जनता ने मुझे जिताया. एक साल के अंदर कटहरी में विकास की लहर साफ दिख रही है. पीडब्ल्यूडी की सड़कें स्वीकृत हुईं, 15 लाख की लागत से पुल का निर्माण शुरू हुआ और काली का चौराहा पर्यटन स्थल के रूप में विकसित हो रहा है. पूरे कटहरी में 75 बड़ी हाई-मास्ट लाइटें और 3400 छोटी लाइटें लगाकर हर चौराहे को रोशन किया गया है.'
सपा का पलटवार
समाजवादी पार्टी के स्थानीय नेतृत्व का कहना है कि 'कटहरी उपचुनाव में सपा हारी नहीं थी, बीजेपी बेईमानी और प्रशासन के दम पर जीती. जिला प्रशासन ने चुनाव लड़वाया था. 2027 के चुनाव के लिए हमारा संगठन पूरी तरह से तैयार है. अभी हम मतदाता सूची (SIR) पर काम कर रहे हैं ताकि वोटों को कटने से बचाया जा सके. 2027 में अंबेडकरनगर की पांचों सीटें जीतकर अखिलेश यादव की झोली में डालेंगे.'
स्थानीय पत्रकारों का आकलन
क्षेत्रीय पत्रकारों के अनुसार, वर्तमान स्थिति में बीजेपी का पलड़ा भारी दिख रहा है क्योंकि बीजेपी के जिलाध्यक्ष, क्षेत्रीय अध्यक्ष सहदेव द्विवेदी, विधायक धर्मराज निषाद और एमएलसी हरिओम पांडे सब इसी क्षेत्र से आते हैं जिससे संगठन बेहद मजबूत है. हालांकि चुनाव पूरी तरह से तीनों प्रमुख दलों (बीजेपी, सपा और बसपा) द्वारा उतारे जाने वाले प्रत्याशियों के चेहरे पर निर्भर करेगा.
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