Mood kya hai Amroha: उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 को लेकर जिले की राजनीति में अभी से गर्माहट देखने को मिल रही है. अमरोहा जिले की चार विधानसभा सीटों-अमरोहा, नौगावा सादात, धनौरा और हसनपुर पर जनता का मूड क्या रहेगा, इसे लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है. वर्तमान में चार सीटों में से दो अमरोहा और नौगावा सादात पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है. जबकि धनौरा और हसनपुर भारतीय जनता पार्टी के पास हैं. यूपी Tak की टीम ने जिले के वरिष्ठ पत्रकारों के साथ अमरोहा के जमीनी समीकरणों, जातीय आंकड़ों और चुनावी संभावनाओं पर एक विस्तृत चर्चा की, जिससे आगामी 2027 के चुनाव का खाका साफ दिखाई दे रहा है.
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अमरोहा विधानसभा सीट पर महबूब अली की मजबूत पकड़ और विपक्ष की चुनौती
अमरोहा सीट का मुख्य समीकरण 70% मुस्लिम और 30% हिंदू आबादी का है. इस सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता महबूब अली लगातार छह बार से विधायक चुने जा रहे हैं. स्थानीय पत्रकारों के अनुसार 'महबूब अली का 24 घंटे जनता के लिए उपलब्ध रहना, लगातार संपर्क और जमीनी पकड़ ही उनकी जीत के मुख्य कारण हैं. पिछले चुनाव में उन्होंने बीजेपी के राम सिंह सैनी को करीब 77,000 वोटों से हराकर राज्य में दूसरा सबसे बड़ा रिकॉर्ड बनाया था.'
बीजेपी और बीएसपी दोनों के पास फिलहाल उनका कोई सीधा विकल्प नहीं दिख रहा है. पत्रकारों का मानना है कि यदि बीजेपी को यहां से जीत हासिल करनी है, तो उसे किसी मजबूत और लोकप्रिय प्रत्याशी पर दांव लगाना होगा या फिर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) के मुस्लिम-दलित ध्रुवीकरण के जरिए ही मुकाबला त्रिकोणीय बन सकता है.
नौगावा सादात विधानसभा सीट
नौगावा सादात में वर्तमान में समाजवादी पार्टी के चौधरी समरपाल सिंह विधायक हैं. इस ग्रामीण बहुल इलाके का सियासी समीकरण कुछ इस प्रकार है.
जातीय समीकरण: क्षेत्र में लगभग 1 लाख से सवा लाख मुस्लिम मतदाता हैं. इसके अलावा सैनी, चौहान, जाट, प्रजापति और कश्यप मतदाताओं की भी अच्छी संख्या है. पिछले चुनाव में मुस्लिम और जाट मतों के ध्रुवीकरण के कारण सपा प्रत्याशी को सफलता मिली थी.
2027 का परिदृश्य: भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर अपना खोया हुआ जनाधार वापस पाने के लिए किसी बड़े चेहरे पर दांव लगा सकती है. वहीं यदि भविष्य में बीएसपी और अन्य गठबंधनों में बदलाव होता है तो चुनाव त्रिकोणीय होने की संभावना भी जताई जा रही है.
धनौरा विधानसभा सीट
धनौरा एक सुरक्षित (SC) सीट है, जहां लगभग 23% दलित और 25-30% मुस्लिम आबादी है.
सिटिंग MLA का प्रभाव: बीजेपी के राजीव तरारा लगातार दूसरी बार यहां से विधायक हैं. जनता में उनकी लोकप्रियता और विकास कार्यों के चलते उन्हें मजबूत माना जा रहा है.
सपा और अन्य दलों की चुनौती: विपक्षी दल (सपा व बीएसपी) दलित-मुस्लिम और जाट मतों का नया गठजोड़ बनाकर यहां बीजेपी को घेरने की योजना बना रहे हैं. हालांकि बीजेपी का परंपरागत कैडर वोट अभी भी विधायक तरारा के साथ मजबूती से खड़ा है.
हसनपुर विधानसभा सीट
हसनपुर सीट से बीजेपी के महेंद्र खड़कवंशी विधायक हैं जिन्होंने पिछले चुनाव में सपा के प्रत्याशी को हराया था. इस सीट पर भी स्थानीय जातीय समीकरण और सत्ता विरोधी लहर का प्रभाव आगामी चुनाव में देखने को मिल सकता है.
अमरोहा जिले की चारों विधानसभा सीटों का विश्लेषण करने पर स्पष्ट होता है कि जहां सपा अपने अनुभवी और जनता के बीच उपलब्ध रहने वाले चेहरों के दम पर मजबूत दिख रही है. वहीं बीजेपी अपने कैडर वोट और नए जातीय प्रयोगों से वापसी की रणनीति बना रही है. 2027 के चुनाव में प्रत्याशियों की व्यक्तिगत छवि, उपलब्धता और ऐन वक्त पर बनने वाले गठबंधन ही अमरोहा की राजनीति की दिशा तय करेंगे.
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