उत्तर प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान बीते दिन जमकर हंगामा हुआ. विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने सपा विधायक को सदन से निष्कासित कर दिया. लेकिन सपा विधायक के निष्कासन की घटना से विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना काफी आहत नजर आए. सत्र की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष ने भावुक होकर अपनी बात रखी. उन्होंने कहा कि वह अपने राजनीतिक जीवन के अंतिम दौर में हैं और सदन में घटी घटनाओं से दुखी व निराश हैं. विधानसभा अध्यक्ष ने यहां तक कह दिया कि वह इस बात पर विचार करेंगे कि क्या वह इस पद के योग्य हैं या नहीं. उनके इस बयान के बाद सदन में सत्ता पक्ष और विपक्ष के नेताओं के बीच चर्चा देखने को मिली.
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राजनीतिक पारी के अंतिम चरण में हूं-भावुक हुए सतीश महाना
सदन की कार्यवाही शुरू होते ही विधानसभा अध्यक्ष सतीश महाना ने बीते दिन के घटनाक्रम पर दुख जताया. उन्होंने कहा कि 'पिछले चार वर्षों में मेरी कोशिश रही कि विधानसभा की गरिमा बरकरार रहे. विपक्ष का काम मुद्दा उठाना है और सरकार का काम सुनना. लेकिन कल जो सदन में हुआ, उससे मैं दुखी और निराश हुआ हूं. क्या मेरे आचरण में कहीं कमी रही या फिर बाबा साहेब अंबेडकर की बात सही थी कि व्यक्ति में ही दिक्कत होती है? मेरी लंबी राजनीतिक पारी रही है और अब मैं इसके अंतिम चरण में हूं. मेरी अपील है कि दलगत राजनीति से ऊपर उठकर विचार करें कि हम आने वाली पीढ़ी को क्या संदेश दे रहे हैं.'
विधानसभा अध्यक्ष ने सदन में बिना अनुमति फोटो और वीडियो खींचकर सोशल मीडिया पर डाले जाने पर भी कड़ी आपत्ति जताई. उन्होंने कहा कि वह जल्द ही इस पर विचार करेंगे कि वे इस पद के लायक हैं या नहीं.
सपा विधायक संग्राम सिंह का पक्ष
सपा विधायक संग्राम सिंह यादव ने विपक्ष का पक्ष रखते हुए कहा कि विपक्ष हमेशा सहयोग करता रहा है. लेकिन प्रदेश और देश के मुद्दों पर बोलना उनकी जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि सदन में विपक्ष के लिए जिस तरह के शब्दों का इस्तेमाल किया गया, वह ठीक नहीं था.
सपा विधायक की बात का जवाब देते हुए सतीश महाना ने कहा 'मैंने आपसे कहा था कि मैं दो घंटे तक आपकी बात सुनूंगा. मैं बार-बार हाथ जोड़ रहा था और आपको अवसर दे रहा था. इसलिए यह मत कहिए कि आपको बोलने का मौका नहीं दिया गया.'
नेता प्रतिपक्ष और वित्त मंत्री के बीच हुई ये चर्चा
माता प्रसाद पांडेय (नेता प्रतिपक्ष): उन्होंने विधानसभा अध्यक्ष से संवाद करते हुए कहा कि यदि विषय पर एक घंटे चर्चा करा दी जाती, तो सारा विवाद वहीं खत्म हो जाता.
सुरेश खन्ना (संसदीय कार्य एवं वित्त मंत्री): सरकार की तरफ से पक्ष रखते हुए सुरेश खन्ना ने विधानसभा अध्यक्ष को ढांढस बंधाया और कहा कि उन्हें निराश होने की आवश्यकता नहीं है, यह सिर्फ एक संसदीय अड़चन है.
आराधना मिश्रा 'मोना' (कांग्रेस विधायक): कांग्रेस नेता ने कहा कि सदन की गरिमा बनाए रखना सभी का कर्तव्य है. कल जो भी हुआ और सचिन यादव पर जो कार्रवाई हुई, वह अध्यक्ष का अधिकार था. हालांकि उन्होंने मांग रखी कि विपक्ष चढ़ावा चोरी जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा चाहता है.
फिलहाल सदन में हंगामे के बाद विधानसभा अध्यक्ष की भावुक टिप्पणी ने राजनीतिक माहौल को गंभीर बना दिया है. जहां सत्ता पक्ष अध्यक्ष के समर्थन में खड़ा दिख रहा है, वहीं विपक्ष अपनी मांगों पर चर्चा कराने की जिद पर अड़ा हुआ है. अध्यक्ष के इस रुख के बाद अब देखना होगा कि सदन की आगे की कार्यवाही कितनी सुचारू रूप से चल पाती है.
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