उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले की सबसे हॉट सीट मानी जाने वाली सहारनपुर नगर (सदर) विधानसभा में 2027 के चुनाव को लेकर अभी से सियासी माहौल गरमाने लगा है. वर्तमान में यह सीट भारतीय जनता पार्टी के पास है और स्थानीय विधायक राजीव गुंबर अपने चार साल के कार्यकाल का रिपोर्ट कार्ड लेकर जनता के बीच पहुंच रहे हैं.
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दूसरी ओर समाजवादी पार्टी, कांग्रेस, बहुजन समाज पार्टी और असदुद्दीन ओवैसी की AIMIM इस सीट पर कमल का फूल मुरझाने की रणनीति बना रही हैं. हालांकि इंडिया गठबंधन के भीतर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद और सपा विधायक आशु मलिक के बीच जारी जुबानी जंग ने विपक्षी खेमे में हलचल तेज कर दी है.
शहर की पहचान और मुख्य चुनावी मुद्दे
व्यापार, लकड़ी उद्योग, होजरी मार्केट और रेलवे स्टेशन के चलते यह शहरी विधानसभा पूरे जिले की राजनीति का केंद्र रही है. स्थानीय निवासियों और व्यापारियों के लिए ट्रैफिक जाम, शहर की सफाई, बेरोजगारी, व्यापारियों की सुरक्षा और विकास कार्यों की रफ्तार हमेशा से अहम चुनावी मुद्दे रहे हैं.
कभी BJP तो कभी विपक्ष का दबदबा
सहारनपुर नगर सीट का इतिहास उतार-चढ़ाव से भरा रहा है.
2007 व 2012: भाजपा के राघव लखनपाल शर्मा ने जीत दर्ज की.
2014 (उपचुनाव): राघव लखनपाल के सांसद बनने के बाद हुए उपचुनाव में भाजपा के राजीव गुंबर पहली बार विधायक बने.
2017: प्रदेश में भाजपा की लहर के बावजूद सपा-कांग्रेस गठबंधन के उम्मीदवार संजय गर्ग ने भाजपा को पटखनी दी.
2022: भाजपा के राजीव गुंबर ने वापसी की और महज 7,434 वोटों के मामूली अंतर से सपा उम्मीदवार को हराकर दोबारा कब्जा जमाया.
राजनीतिक दलों के दावे और दांव
भाजपा विधायक राजीव गुंबर का कहना है कि वे चुनाव के समय नहीं बल्कि अपनी जीत के पहले दिन से ही जनता के बीच रहकर काम कर रहे हैं. उन्होंने लकड़ी नक्काशी उद्योग को 24 घंटे बिजली देने, ODOP योजना में शामिल करने और होजरी क्लस्टर विकसित करने जैसे विकास कार्यों को अपनी उपलब्धि बताया.
सपा नेताओं का तर्क है कि 2022 के विधानसभा चुनाव में हार का अंतर बहुत कम था. जबकि 2024 के लोकसभा चुनाव में सहारनपुर नगर विधानसभा क्षेत्र के भीतर सपा-कांग्रेस गठबंधन को भाजपा से 7,122 वोट अधिक मिले थे. पार्टी का दावा है कि बूथ और सेक्टर स्तर पर उनका संगठन मजबूत है और वे 2027 में भारी मतों से वापसी करेंगे.
विपक्षी खेमे में रार
स्थानीय राजनीतिक विश्लेषकों के मुताबिक, इस सीट पर सबसे बड़ा पेंच कांग्रेस और सपा के आपसी तालमेल को लेकर है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद लगातार अपनी दावेदारी पेश कर रहे हैं. जबकि सपा विधायक आशु मलिक से उनकी बयानबाजी जगजाहिर है. जानकारों का मानना है कि यदि सपा और कांग्रेस का गठबंधन कायम रहता है तो उम्मीदवार को सीधा फायदा मिलेगा. लेकिन यदि टिकट को लेकर दोनों दलों के नेताओं में भीतरघात या बागी उम्मीदवार खड़े हुए तो विपक्ष की जीत की संभावनाएं धूमिल हो सकती हैं.
इसके अलावा ओवैसी (AIMIM) की हालिया रैली और बसपा का पुराना जनाधार मुस्लिम वोटों में बिखराव पैदा कर सकता है जिसका सीधा सियासी फायदा भाजपा को मिल सकता है.
सहारनपुर नगर सीट का 'जातीय गणित'
इस सीट पर जीत की चाबी मुस्लिम और शहरी पंजाबी वोटरों के हाथ में मानी जाती है.
| जाति/समुदाय | अनुमानित मतदाता संख्या |
|---|---|
| मुस्लिम मतदाता | 1,45,000 – 1,55,000 |
| पंजाबी (खत्री/अरोड़ा) | 45,000 – 50,000 |
| दलित मतदाता | 30,000 – 35,000 |
| वैश्य एवं जैन समाज | 18,000 – 22,000 |
| त्यागी समाज | 18,000 – 22,000 |
| ब्राह्मण समाज | 16,000 – 20,000 |
| ठाकुर मतदाता | 14,000 – 18,000 |
| सैनी एवं कश्यप | 14,000 – 18,000 |
| गुर्जर मतदाता | 12,000 – 16,000 |
| जाट मतदाता | 5,000 – 8,000 |
सहारनपुर नगर विधानसभा सीट पर 2027 का मुकाबला केवल पार्टियों की नीतियों पर नहीं बल्कि प्रत्याशी की व्यक्तिगत छवि, विपक्षी एकजुटता और भीतरघात को रोकने की क्षमता पर तय होगा.
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