अखिलेश यादव के गांव में कौन बनेगा प्रधान? सैफई ग्राम पंचायत चुनाव की ग्राउंड रिपोर्ट

Akhilesh Yadav Village Election: उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र और समाजवादी पार्टी का मजबूत किला माने जाने वाले सैफई गांव में आगामी ग्राम पंचायत चुनावों को लेकर हलचल तेज हो गई है. यूपी Tak की ग्राउंड रिपोर्ट में सैफई के मौजूदा प्रधान रामफल वाल्मीकि ने बात करते हुए बताया है कि अखिलेश यादव के गांव में कौन बनेगा प्रधान?

Akhilesh Yadav and ramfal valmiki

अमित तिवारी

14 Jan 2026 (अपडेटेड: 14 Jan 2026, 12:52 PM)

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Saifai Gram Panchayat:उत्तर प्रदेश की राजनीति का केंद्र माना जाने वाला सैफई गांव एक बार फिर चर्चा में है. आगामी ग्राम पंचायत चुनावों की आहट के साथ ही समाजवादी पार्टी के गढ़ कहे जाने वाले इस गांव में चुनावी सरगर्मी तेज हो गई है. यूपी Tak की टीम ने सैफई के जमीनी हालात और वहां के लोगों की राय जानने के लिए अखिलेश के गांव का दौरा किया.  

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अत्याधुनिक विकास का प्रतीक सैफई

सैफई कहने को तो एक गांव है, लेकिन यहां की सुविधाएं किसी बड़े शहर को मात देती हैं. मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव के प्रयासों से यहां इंटरनेशनल क्रिकेट स्टेडियम, मेडिकल यूनिवर्सिटी (UPUMS), स्पोर्ट्स कॉलेज, अत्याधुनिक सड़कें और एक्सप्रेसवे जैसी सुविधाएं मौजूद हैं. गांव के लोगों के लिए मुलायम सिंह यादव 'साक्षात भगवान' की तरह हैं और उनका मानना है कि सैफई की एक-एक ईंट नेताजी की देन है. 

मौजूदा प्रधान रामफल वाल्मीकि क्या कहते हैं?

वर्तमान ग्राम प्रधान रामफल वाल्मीकि अपनी सफलता का श्रेय पूरी तरह से यादव परिवार (अखिलेश, शिवपाल और रामगोपाल यादव) को देते हैं. उन्होंने अपने कार्यकाल की कुछ महत्वपूर्ण उपलब्धियां भी गिनाईं. उन्होंने बताया कि 'डेरा बंजारे' कहे जाने वाले इलाके का नाम बदलकर 'रणवीर नगर' रखा और वहां आरसीसी सड़कें, बिजली व शौचालय की व्यवस्था की. ग्राम पंचायत की निधि से नवोदय विद्यालय में एक अत्याधुनिक लैब बनवाई, जिसके लिए प्रशासन ने उन्हें सम्मानित भी किया.

यहां नीचे देखिए सैफई ग्राम पंचायत की ग्राउंड रिपोर्ट

चुनाव पर क्या है रुख?

जब रामफल वाल्मीकि से पूछा गया कि क्या वे इस बार भी चुनाव लड़ेंगे, तो उन्होंने साफ कहा कि जो आदेश राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव और नेताजी का परिवार देगा, वही मंजूर होगा. सैफई में प्रधान की उम्मीदवारी अक्सर यादव परिवार के निर्णय पर ही निर्भर करती है.  

ग्रामीणों की शिकायत और उम्मीद

सैफई के बुजुर्गों और युवाओं का कहना है कि नेताजी के जाने के बाद और सरकार बदलने से सैफई के विकास की गति कुछ धीमी हुई है. ग्रामीणों का आरोप है कि मौजूदा सरकार द्वारा स्टेडियम और कुछ अन्य अधूरे कामों के लिए फंड नहीं दिया जा रहा है. हालांकि, उन्हें उम्मीद है कि अखिलेश यादव नेताजी की विरासत को आगे बढ़ाएंगे.

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