उत्तर प्रदेश के महोबा में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर अनैतिक मांग का आरोप लगाकर चर्चा में आईं दीपाली तिवारी कोई नया चेहरा नहीं हैं. उनका नाता एक प्रतिष्ठित राजनीतिक और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी परिवार से है. आइए जानते हैं कौन हैं दीपाली तिवारी और क्या है उनके परिवार का इतिहास?
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दीपाली तिवारी की कहानी आई सामने
दीपाली तिवारी का मायका कौशांबी जिले में है. उनका परिवार दशकों से राजनीति और समाजसेवा से जुड़ा रहा है. दीपाली के दादा स्वतंत्रता संग्राम सेनानी थे. करीब पांच दशक पहले उनके दादा मंगला प्रसाद तिवारी (उर्फ जर्मन मास्टर) कौशांबी की चायल विधानसभा सीट से विधायक रह चुके हैं. राजनीतिक रसूख उन्हें विरासत में मिला है.
जिला मंत्री से लेकर 'बेटी बचाओ' की संयोजिका तक, ऐसा रहा दीपाली का सफर
दीपाली तिवारी पिछले 9 सालों तक भाजपा में जिला मंत्री के पद पर रहीं. इससे पहले वह जिले में 'बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ' अभियान की जिला संयोजिका की जिम्मेदारी भी संभाल चुकी हैं. इसी साल की शुरुआत में उन्होंने जिला मंत्री पद से इस्तीफा दिया था. उनके पति शशांक तिवारी मंडी परिषद में ठेकेदारी करते थे.
क्या है पूरा विवाद?
महोबा की राजनीति में यह विवाद तब गरमाया जब दीपाली तिवारी ने जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा पर सनसनीखेज आरोप लगाए. दीपाली का आरोप है कि वह 10 साल से पार्टी की सेवा कर रही हैं, इसलिए उन्होंने जिलाध्यक्ष से जिला उपाध्यक्ष या महामंत्री जैसे उच्च पद की मांग की थी. आरोप है कि जिलाध्यक्ष ने पद देने के बदले हमबिस्तर होने की शर्त रखी.
दीपाली ने एसपी को दी तहरीर में बताया कि जब उन्होंने जिलाध्यक्ष की शर्त मानने से इनकार किया, तो उन्हें धमकी दी गई. आरोप है कि मोहनलाल कुशवाहा ने कहा कि यदि वह शांत नहीं हुईं, तो उनके पति पर धारा 376 (दुष्कर्म) का झूठा केस लगवाकर उन्हें जेल भिजवा देंगे.
जिलाध्यक्ष का क्या है पक्ष?
वहीं, जिलाध्यक्ष मोहनलाल कुशवाहा ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है. उनका कहना है कि ये आरोप पूरी तरह निराधार और मनगढ़ंत हैं. उन्होंने इसे अपनी छवि खराब करने की एक साजिश करार दिया है और आरोपों की घोर निंदा की है. दीपाली तिवारी ने न्याय की गुहार लगाते हुए महोबा पुलिस अधीक्षक (SP) को प्रार्थना पत्र सौंपा है. एक तरफ जहां पुलिस तथ्यों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी तरफ एक 'राजनीतिक परिवार' से ताल्लुक रखने वाली महिला कार्यकर्ता के इन आरोपों ने भाजपा के भीतर संगठनात्मक रार को चौराहे पर ला दिया है.
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