क्या गाजीपुर की घटना अखिलेश यादव को पड़ जाएगी भारी, सपा चीफ ने अब क्यों कही गोरिल्ला युद्ध की बात?

UP Political News: यूपी तक के खास शो 'आज का यूपी' में देखिए गाजीपुर हिंसा की पूरी पड़ताल. अखिलेश यादव ने क्यों किया गोरिल्ला वॉर का एलान? जानें पुलिस की जांच और पूर्वांचल के नए सियासी समीकरण.

Akhilesh Yadav

कुमार अभिषेक

25 Apr 2026 (अपडेटेड: 25 Apr 2026, 08:45 AM)

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उत्तर प्रदेश की सियासत में इन दिनों गाजीपुर की एक घटना ने उबाल ला दिया है. UP Tak का खास शो 'आज का यूपी' आपके लिए लेकर आया है राज्य की तीन ऐसी बड़ी खबरें, जो न केवल कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाती हैं, बल्कि आने वाले समय में पूर्वांचल की राजनीतिक दिशा भी तय कर सकती हैं.

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आज हम सबसे पहले विश्लेषण गाजीपुर हिंसा और सपा की नई रणनीति का करेंगे जहां अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को 'गोरिल्ला वार' के लिए तैयार रहने को कहा है. दूसरी खबर पुलिस की तफ्तीश और चौंकाने वाले खुलासे की, जिसमें सीसीटीवी फुटेज ने घटना की शुरुआती थ्योरी को बदल दिया है. और तीसरी बड़ी खबर ब्राह्मण बनाम पिछड़ा राजनीति की, जिसने पूर्वांचल में पीडीए के समीकरणों के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है.

अखिलेश यादव का एलान- सरकार के खिलाफ अब गोरिल्ला युद्ध की तैयारी

गाजीपुर के कटरिया गांव में हुई हिंसा के बाद समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव का बेहद आक्रामक रूप देखने को मिला है. अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं पर हुई एफआईआर से नाराज अखिलेश यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में एक ऐसे शब्द का इस्तेमाल किया जिसने सियासी गलियारों में हलचल तेज कर दी है. उन्होंने साफ कहा कि अब सरकार के खिलाफ गोरिल्ला युद्ध (छापामार युद्ध) का समय आ गया है.

अखिलेश यादव ने कार्यकर्ताओं को निर्देश दिया है कि अब किसी पीड़ित परिवार से मिलने जाने के लिए सरकार या पुलिस की अनुमति की जरूरत नहीं है. उन्होंने कहा, "आप बता कर क्यों जा रहे हो? अब बिना बताए जाइए, देखते हैं पुलिस कैसे रोकती है."  सपा को लगता है कि अति पिछड़ी बिरादरी (विश्वकर्मा समाज) की बेटी के लिए खड़ा होना उनके पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) नैरेटिव को मजबूत करेगा, भले ही इसके लिए उन्हें 'रौद्र रूप अपनाना पड़े.

सीसीटीवी फुटेज और कॉल रिकॉर्ड्स ने खोली पोल?

गाजीपुर की जिस घटना को लेकर इतना बवाल मचा है, उस पर पुलिस की जांच रिपोर्ट ने चौंकाने वाले तथ्य पेश किए हैं. शुरुआती आरोपों में कहा गया था कि विश्वकर्मा समाज की लड़की के साथ गैंगरेप और हत्या की गई है. हालांकि, पुलिस की गहन जांच में यह दावे फिलहाल कमजोर नजर आ रहे हैं. पुलिस को मिले सीसीटीवी फुटेज में लड़की रात के समय अकेले नदी की ओर जाती हुई दिखाई दे रही है. कॉल रिकॉर्ड एनालिसिस से पता चला है कि घटना वाली सुबह 5:22 बजे तक लड़की अपने भाई के संपर्क में थी.

पुलिस ने साफ किया है कि मेडिकल रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई है. पुलिस का यह भी आरोप है कि सपा के डेलीगेशन के साथ आए लोग पूरी तैयारी और प्लानिंग के साथ लाठियां और पत्थर लेकर पहुंचे थे, जिसका मकसद मामले को जातिगत रंग देना था.

पूर्वांचल की सियासी बिसात- पीडीए बनाम सवर्ण वोट बैंक का टकराव

गाजीपुर की इस घटना ने पूर्वांचल में एक बार फिर 'अगड़ा बनाम पिछड़ा' की राजनीति को हवा दे दी है. जिस गांव में यह विवाद हुआ, वहां ब्राह्मण और ठाकुर बिरादरी की संख्या अधिक है, जबकि मृतका विश्वकर्मा समाज से थी. समाजवादी पार्टी इस मुद्दे के जरिए अति पिछड़ी जातियों में अपनी पैठ मजबूत करना चाहती है, लेकिन इस रणनीति के अपने जोखिम भी हैं.

एक तरफ जहां सपा खुद को पिछड़ों का मसीहा साबित करने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ इस विवाद ने ब्राह्मण समाज को सरकार के साथ खड़े होने पर मजबूर कर दिया है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अगर पुलिस यह साबित करने में सफल रही कि यह हत्या या रेप का मामला नहीं था, तो यह सपा की छवि पर भारी पड़ सकता है. यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या अखिलेश यादव का यह 'गोरिल्ला वार' दांव उन्हें 2027 के चुनावों में फायदा दिलाएगा या फिर पार्टी की पुरानी छवि को वापस लाकर नुकसान पहुंचाएगा.

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