Akhilesh Yadav: समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने महिला आरक्षण बिल को लेकर केंद्र की भाजपा सरकार पर जोरदार हमला बोला है. लखनऊ में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अखिलेश यादव ने इसे महिलाओं को सम्मान देने के बजाय महज एक चुनावी नारा करार दिया. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा इस बिल के बहाने देश के PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) समाज को कमजोर करने और उन्हें आपस में बांटने की सोची-समझी रणनीति पर काम कर रही है.
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पीएम के संबोधन पर जताई मायूसी
अखिलेश यादव ने कटाक्ष करते हुए कहा कि 'जब प्रधानमंत्री के कल रात 8 बजे के संबोधन की खबर आई तो पूरे देश को उम्मीद थी कि शायद सरकार किसी महिला को प्रधानमंत्री बनाने जैसा कोई ऐतिहासिक ऐलान करेगी. लेकिन अंत में हाथ केवल मायूसी लगी. उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा महिलाओं को अधिकार देने के बजाय उन्हें केवल वोट बैंक के रूप में देख रही है.
'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की मांग
सपा मुखिया ने साफ किया कि उनकी पार्टी आधी आबादी को हक और सम्मान देने के पक्ष में है. लेकिन वे इस बिल के स्वरूप से सहमत नहीं हैं. उन्होंने मांग की कि इस बिल में पिछड़े और दलित वर्ग की महिलाओं के लिए विशेष हक की व्यवस्था होनी चाहिए. उन्होंने 'आरक्षण के भीतर आरक्षण' की वकालत करते हुए कहा कि बिना इसके इस बिल का कोई जमीनी लाभ नहीं मिलेगा और पिछड़े-दलित वर्ग की महिलाएं इससे वंचित रह जाएंगी.
जनगणना से भाग रही सरकार
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर का उल्लेख करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि सरकार जनगणना के अनिवार्य नियम से भाग रही है. उन्होंने सवाल किया कि अगर 2011 की पुरानी जनगणना को ही आधार बनाया जाएगा तो महिलाओं को उनका वास्तविक अधिकार कैसे मिलेगा? सपा प्रमुख का दावा है कि इस बिल को जल्दबाजी में लाने का असली मकसद जातिगत जनगणना को रोकना है.क्योंकि जनगणना होने पर सरकार को हर वर्ग की वास्तविक आबादी का खुलासा करना पड़ेगा.
भाजपा की कार्यशैली पर सवाल
अखिलेश ने भाजपा पर 'बांटो और राज करो' की नीति अपनाने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा कि भाजपा पहले लोगों को बांटती है और फिर डर पैदा कर उन्हें अपने पाले में लाने की कोशिश करती है.हालांकि उन्होंने भरोसा जताया कि आज की जागरूक और पढ़ी-लिखी बेटियां अब इनके बहकावे में आने वाली नहीं हैं. साथ ही उन्होंने भाजपा संगठन के भीतर महिलाओं के प्रतिनिधित्व पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जो पार्टी खुद महिलाओं को उचित सम्मान नहीं दे रही वह देश की 33 प्रतिशत महिलाओं को क्या अधिकार देगी?
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