Akhilesh Yadav vs Smriti Irani: लोकसभा में अखिलेश यादव और स्मृति ईरानी के बीच छिड़ी जुबानी जंग अब और तेज हो गई है. 'सास-बहू' सीरियल वाले तंज पर पलटवार करते हुए पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी ने अखिलेश यादव को सीधी चुनौती दी है. वाराणसी में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने कहा कि अगर अखिलेश में वाकई दम है, तो वे अपनी सुरक्षित पैतृक सीट (कन्नौज) छोड़कर गोरखपुर से चुनाव लड़कर दिखाएं.
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'हमने गढ़ में हराया, आप भी लड़कर दिखाएं'
स्मृति ईरानी ने अमेठी का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने मेहनत के दम पर कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी को उनके गढ़ में धूल चटाई है. उन्होंने अखिलेश पर निशाना साधते हुए कहा, "जिन्हें राजनीति विरासत में मिली है, वे उन पर टिप्पणी कर रहे हैं जिन्होंने अपने दम पर पहचान बनाई है. कामकाजी महिला पर वे लोग बोल रहे हैं जिन्होंने जीवन में कभी नौकरी नहीं की. हम टैक्स भरते हैं ताकि देश का विकास हो, इसलिए नहीं कि सदन में सास-बहू की बातें की जाएं."
संसद पर ध्यान दें, सीरियल पर नहीं: ईरानी
ईरानी ने अखिलेश को नसीहत दी कि वे सीरियल की बातें छोड़कर संसद के कामकाज और महिला सशक्तीकरण बिल पर ध्यान दें. उन्होंने तंज कसा कि एक गंभीर राजनेता के पास सीरियल देखने का वक्त नहीं होता. उन्होंने 'X' (पहले ट्विटर) पर भी लिखा था कि अच्छा है जिन्हें राजनीति धरोहर में मिली, वे उन्हें याद कर रहे हैं जो अपने दम पर 'आसमान में सुराख' करते हैं.
अखिलेश यादव ने दिया था फिर शायराना पलटवार
स्मृति ईरानी की चुनौती और तीखे बयानों के बाद सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी पीछे हटने के बजाय शायराना अंदाज में जवाब दिया. उन्होंने चार पंक्तियों के जरिए भाजपा पर जनता से दूर होने का आरोप लगाया:
हर बात से अगर साजिश की बू आई न होती,
यकीन करते लोग अगर बात जुमलाई न होती,
दरअसल अगर अवाम से दोस्ती निभाई होती,
तो इतनी जल्दी विदाई की घड़ी आई न होती.
हाई हो गया है यूपी का सियासी पारा
संसद के विशेष सत्र से शुरू हुई यह बहस अब उत्तर प्रदेश की गलियों तक पहुंच गई है. स्मृति ईरानी का अखिलेश को गोरखपुर से चुनाव लड़ने का चैलेंज देना और अखिलेश का विदाई वाला तंज, सूबे में आने वाले चुनाव से पहले बड़े सियासी टकराव का संकेत दे रहे हैं.
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