यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' राज्य की राजनीतिक और सामाजिक हलचलों का सबसे सटीक विश्लेषण पेश करता है. इस शो में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं, जिसमें शामिल है गाजीपुर में सपा डेलिगेशन पर हुआ पथराव और उसके पीछे की पूरी कहानी, महिला आरक्षण बिल को लेकर छिड़ी सियासी जंग के बीच अखिलेश यादव का अपनी दिवंगत मां पर हुई टिप्पणी पर भावुक जवाब, और इस पूरे घटनाक्रम में लखनऊ मेयर सुषमा खरकवाल की सफाई.
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गाजीपुर में सपा डेलिगेशन पर पथराव, क्या था पूरा मामला?
गाजीपुर के कटरिया गांव में उस वक्त तनाव की स्थिति पैदा हो गई जब समाजवादी पार्टी के एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधि मंडल पर ग्रामीणों और सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों ने पथराव कर दिया. इस हमले में पूर्व मंत्री राम आश्रय विश्वकर्मा समेत कई नेता और पुलिसकर्मी घायल हो गए.
क्या है विवाद की जड़?
यह पूरा मामला निशा विश्वकर्मा नाम की युवती की संदिग्ध मौत से जुड़ा है. निशा की लाश नदी किनारे मिली थी, जिसके बाद परिवार ने हत्या का आरोप लगाया. पुलिस ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए आरोपी को गिरफ्तार भी किया, लेकिन सपा ने पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने के लिए एक डेलिगेशन भेजने का फैसला किया.
चेतावनी को किया गया नजरअंदाज?
घटना से पहले ही ग्राम प्रधान प्रतिनिधि आशुतोष सिंह 'आशु' ने प्रशासन को पत्र लिखकर चेतावनी दी थी कि डेलिगेशन को गांव में न आने दिया जाए, वरना माहौल बिगड़ सकता है. इस बात की जानकारी अखिलेश यादव को भी थी, लेकिन सपा नेताओं ने इसे 'तालिबानी फरमान' बताते हुए गांव जाने का फैसला किया, जिसका नतीजा हिंसक झड़प और पथराव के रूप में सामने आया.
कौन हैं आशुतोष सिंह 'आशु'?
आशुतोष सिंह आशु वर्तमान ग्राम प्रधान रीना सिंह के बेटे और प्रतिनिधि हैं. इलाके में उनकी छवि एक सक्रिय युवा भाजपा नेता की है. अखिलेश यादव ने इस हमले को 'सत्ता पोषित वर्चस्ववादियों' का हमला करार देते हुए इसे सीधे PDA (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) के साथ जोड़ दिया है.
दिवंगत मां पर टिप्पणी और अखिलेश यादव का भावुक पलटवार
राजनीति में अक्सर शब्दों की मर्यादाएं टूटती हैं, लेकिन हाल ही में लखनऊ की मेयर सुषमा खरकवाल के एक कथित बयान ने सियासी गलियारों में नई बहस छेड़ दी है. सोशल मीडिया पर एक बयान वायरल हुआ जिसमें कहा गया कि अखिलेश यादव ने उस मां का अपमान किया है जिसने उन्हें जन्म दिया.
अखिलेश यादव का भावुक पत्र:
अपनी दिवंगत मां का जिक्र आने पर अखिलेश यादव ने बेहद भावुक और कड़ा जवाब दिया. उन्होंने मेयर को संबोधित करते हुए लिखा, "आदरणीय सुषमा खरकवाल जी, कृपया अपनी राजनीतिक मजबूरी वश मेरी दिवंगत मां का नाम लेकर एक महिला के रूप में दूसरी महिला का अपमान न करें." उन्होंने आगे कहा कि भारतीय समाज में किसी भी मां का अपमान स्वीकार नहीं है और वे किसी क्षमा की अपेक्षा नहीं रखते, बस मेयर का आत्म-पछतावा ही उनके लिए काफी होगा.
मेयर सुषमा खरकवाल की सफाई: "मेरा मतलब भारत माता से था"
अखिलेश यादव के भावुक पलटवार के बाद लखनऊ मेयर सुषमा खरकवाल ने अपने बयान पर सफाई पेश की है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके शब्दों को गलत संदर्भ में लिया गया.
सफाई का तर्क:
मेयर ने कहा कि वे किसी व्यक्ति विशेष की माता की नहीं, बल्कि 'भारत माता' और 'आधी आबादी' (नारी शक्ति) की बात कर रही थीं. उन्होंने तर्क दिया कि महिला आरक्षण बिल का विरोध करना उस नारी शक्ति का अपमान है जिसने हमें जन्म दिया, उंगली पकड़कर चलना सिखाया. उन्होंने विपक्षी नेताओं पर हमला बोलते हुए कहा कि जब कोई विदेश में जाकर देश का अपमान करता है, तो वह भारत माता का अपमान है.
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