'दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा'... रितेश्वर महाराज ने ऐसा क्या कहा कि छलक पड़े बृजभूषण सिंह के आंसू 

UP News: गोंडा के नंदिनी नगर में क्यों रो पड़े बृजभूषण शरण सिंह? जानिए कौन हैं मेडिकल की पढ़ाई छोड़ संत बने सद्गुरु रितेश्वर महाराज और क्या है उनके रहस्यमयी 'धर्मदंड' का सच.

कुमार अभिषेक

06 Jan 2026 (अपडेटेड: 06 Jan 2026, 10:30 AM)

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UP News: उत्तर प्रदेश की सियासत और गलियारों की हर बड़ी हलचल लेकर हाजिर है हमारा खास शो 'आज का यूपी'. आज की तीन बड़ी खबरों में सबसे पहले बात करेंगे भाजपा के पूर्व बृजभूषण शरण सिंह के छलकते आंसुओं की, आखिर दबदबे की बात सुनकर क्यों रो पड़े बाहुबली नेता? दूसरी बड़ी खबर उस रहस्यमयी संत की है जिन्होंने मेडिकल की पढ़ाई छोड़ आध्यात्म का रास्ता चुना और जिनके धर्मदंड की चर्चा पूरे प्रदेश में है. और तीसरी बड़ी खबर है राष्ट्रकथा के उस अनोखे स्वरूप की, जहां भागवत नहीं बल्कि राष्ट्रवाद और मोटिवेशन की क्लास लग रही है.

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दबदबे की बात और बृजभूषण के आंसू! मंच पर भावुक हुए पूर्व सांसद

इन दिनों सोशल मीडिया पर बृजभूषण शरण सिंह का एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वह रुंधे हुए गले से रोते नजर आ रहे हैं. मौका था उनके नंदिनी नगर (गोंडा) में चल रही कथा का. जब व्यासपीठ पर बैठे सद्गुरु रितेश्वर महाराज ने बृजभूषण के उस चर्चित संवाद 'दबदबा था, दबदबा है और दबदबा रहेगा' को दोहराया, तो बृजभूषण अपने जज्बात काबू नहीं कर पाए. संत ने मंच से दहाड़ते हुए कहा कि अगर लोगों को लगता है कि इनका दबदबा है, तो यहां इनका बाप बैठा है जिसका दबदबा हमेशा रहेगा. यह सुनते ही हजारों की भीड़ के बीच बाहुबली नेता की आंखों से आंसू छलक पड़े.

कौन हैं सद्गुरु रितेश्वर महाराज? मेडिकल कॉलेज से आध्यात्म तक का सफर

बृजभूषण शरण सिंह को भावुक करने वाले संत सद्गुरु रितेश्वर महाराज इन दिनों यूपी में चर्चा का केंद्र हैं. वह कोई साधारण कथावाचक नहीं हैं बल्कि एक पूर्व मेडिकल छात्र रह चुके हैं जिन्होंने बीच में ही डॉक्टरी की पढ़ाई छोड़कर संन्यास ले लिया था. रितेश्वर महाराज को उनकी अनूठी शैली, तीखे नैन-नक्श और सिर पर बंधी लंबी जटाओं के लिए जाना जाता है. उनके पास एक खास धर्मदंड है, जिसे वह हमेशा अपने मस्तक से लगाकर रखते हैं. उनका दावा है कि इस दंड में 9 ग्रह और 8 सिद्धियां समाहित हैं, जो उन्हें हिमालय में एक साधु से प्राप्त हुआ था.

न हिंदू राष्ट्र की बात, न मजहबी वाद युवाओं को भा रही राष्ट्रकथा!

नंदिनी नगर में हो रही यह कथा पारंपरिक भागवत या रामचरितमानस की कथाओं से बिल्कुल अलग है. इसे राष्ट्रकथा का नाम दिया गया है. सद्गुरु रितेश्वर महाराज यहां किसी वाद या हिंदू राष्ट्र की वकालत नहीं करते, बल्कि वह एक मोटिवेटर की तरह युवाओं को नशे से दूर रहने, पर्यावरण बचाने और सामाजिक बुराइयों से लड़ने की प्रेरणा दे रहे हैं. आईआईटी बाबा के साथ उनके शास्त्रार्थ के चर्चे भी खूब रहे हैं. बृजभूषण शरण सिंह के विशाल शिक्षण संस्थानों के नेटवर्क से जुड़े हजारों युवा इस कथा में शामिल होकर जीवन जीने का नया सलीका सीख रहे हैं.

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