UP Political News: यूपी Tak के खास शो आज का यूपी में उत्तर प्रदेश की सियासत की तीन बड़ी खबर पेश हैं. पहली खबर भाजपा के पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से संबंधित हैं. क्षत्रिय समाज में सबसे बड़ा कौन की बहस पर बृजभूषण शरण सिंह का गुस्सा फूटा है. उन्होंने राजा भैया के पिता को आदर्श बताते हुए राजनाथ सिंह को सबसे बड़ा नेता करार दिया है. वहीं, मायावती ने अपने 70वें जन्मदिन पर गठबंधन के लिए वोट ट्रांसफर की नई शर्त रख दी है. उन्होंने साफ किया कि वह भविष्य में उसी के साथ जाएंगी जो अपना वोट बसपा को दिला सके. मायावती के धुर विरोधी रहे स्वामी प्रसाद मौर्य के शुभकामना संदेश ने बसपा में पुराने साथियों की वापसी की चर्चाएं तेज कर दी हैं.
ADVERTISEMENT
'सबसे बड़ा क्षत्रिय नेता कौन?' बृजभूषण शरण सिंह ने राजा भैया और अभय सिंह पर तोड़ी चुप्पी
हाल ही में आयोजित राष्ट्रकथा के बाद सोशल मीडिया पर बृजभूषण शरण सिंह की तुलना राजा भैया और अभय सिंह जैसे नेताओं से होने लगी. चर्चा ये थी कि राजा भैया और बृजभूषण में कौन बड़ा ठाकुर नेता है? इससे नाराज होकर पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने एक वीडियो जारी कर अपनी स्थिति स्पष्ट की. उन्होंने कहा कि राजा भैया के पिता उदय सिंह उनके आदर्श हैं और राजा भैया उनके छोटे भाई और बच्चों के मित्र जैसे हैं.
सियासी गलियारों में चर्चा है कि यह नाराजगी उन नेताओं के प्रति है जो राष्ट्रकथा में शामिल नहीं हुए थे. बृजभूषण ने दोटूक कहा कि राजनीति में राजनाथ सिंह ही सबसे बड़े क्षत्रिय नेता हैं और समाज को सोशल मीडिया के जरिए बांटने का काम न किया जाए.
मायावती का 70वां जन्मदिन- गठबंधन के लिए वोट ट्रांसफर का फॉर्मूला
बसपा सुप्रीमो मायावती ने अपने जन्मदिन पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर भविष्य की राजनीति का रोडमैप तैयार किया. हालांकि शॉर्ट सर्किट के कारण कॉन्फ्रेंस जल्दी खत्म करनी पड़ी, लेकिन उन्होंने महत्वपूर्ण संदेश दे दिया. मायावती ने कहा कि वह फिलहाल अकेले लड़ रही हैं, लेकिन भविष्य में उस पार्टी के साथ गठबंधन संभव है जो अपना वोट बसपा को ट्रांसफर कराने की क्षमता रखती हो. जानकारों का मानना है कि उनका इशारा कांग्रेस की ओर हो सकता है, बशर्ते कांग्रेस सवर्ण और विशेषकर ब्राह्मण वोट बैंक को वापस लाने और उसे बसपा के पक्ष में मोड़ने में सफल रहे.
ब्राह्मण कार्ड और स्वामी प्रसाद मौर्य का बदला अंदाज
बसपा चीफ मायावती ने ब्राह्मण समाज को भी साधा और कहा कि वे केवल पार्टी में बाटी चोखा तक सीमित न रहें, बसपा ने उन्हें हमेशा सम्मान दिया है. वहीं, एक चौंकाने वाला घटनाक्रम स्वामी प्रसाद मौर्य को लेकर रहा. जिन्होंने अतीत में मायावती पर तीखे हमले किए थे, उन्होंने सबसे पहले मायावती को जन्मदिन की बधाई दी. इससे यह संकेत मिल रहे हैं कि क्या पुराने बसपाई नेता एक बार फिर नीले झंडे के नीचे आने की तैयारी कर रहे हैं?
ADVERTISEMENT









