सपा-कांग्रेस तल्खी के बीच संसद में मिले राहुल और अखिलेश यादव, सीटों के बंटवारे पर बन गई बात?

कुमार अभिषेक

• 11:35 AM • 21 Jul 2026

आज का यूपी में ओवैसी के गठबंधन वाले बयान, मुस्लिम वोट बैंक की सियासत और राहुल गांधी-अखिलेश यादव की मुलाकात का विश्लेषण. जानिए 2027 चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस की रणनीति, सीट बंटवारे की खींचतान और बदलते राजनीतिक समीकरण.

Rahul Gandhi and Akhilesh Yadav

Rahul Gandhi and Akhilesh Yadav

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यूपी Tak के खास शो आज का यूपी में हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. आज के इस शो में उत्तर प्रदेश की राजनीति से जुड़े तीन बड़े घटनाक्रमों पर चर्चा की गई है. इसमें सबसे पहली खबर असदुद्दीन ओवैसी द्वारा सहारनपुर रैली में अखिलेश यादव और राहुल गांधी को गठबंधन के लिए दी गई सीधी चेतावनी और 'गिरेबान पकड़ने' की धमकी से जुड़ी है. दूसरी खबर में यह विश्लेषण किया गया है कि क्यों ओवैसी का यह दबदबा समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के लिए एक नया सियासी सिरदर्द बन चुका है और कैसे इमरान मसूद जैसे नेता ओवैसी को लेकर नरमी दिखा रहे हैं. वहीं तीसरी बड़ी खबर में संसद सत्र के पहले दिन राहुल गांधी और अखिलेश यादव के बीच हुई अहम मुलाकात और सपा-कांग्रेस गठबंधन में सीटों के बंटवारे को लेकर जारी तनातनी का पूरा सच सामने आया है.

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'आज दोस्ती का हाथ, कल गिरेबान पकड़ेंगे'— ओवैसी 

उत्तर प्रदेश के राजनीतिक माहौल में उस वक्त अचानक भूचाल आ गया जब एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने सहारनपुर की रैली से सीधे अखिलेश यादव और राहुल गांधी पर निशाना साधा. भारी भीड़ के सामने ओवैसी ने हुंकार भरते हुए कहा कि आज वे बीजेपी को रोकने के लिए दोस्ती का हाथ बढ़ा रहे हैं. लेकिन अगर इसे कमजोरी समझा गया तो यही हाथ कल विरोधियों के गिरेबान तक पहुंचेगा.

ओवैसी ने चेतावनी देते हुए कहा 'बिहार में भी यही कहा गया था कि ओवैसी के पास एक वोट है. लेकिन जब नतीजे आएंगे तो रोना मत कि हम हार गए.अगर हमको साथ नहीं लोगे तो तुम हारोगे.'

ऑफर या सियासी ब्लैकमेल?

राजनीतिक गलियारों में सवाल उठ रहा है कि क्या ओवैसी का यह बयान गठबंधन की कोई गंभीर पेशकश है या फिर चुनाव से पहले इंडिया (INDIA) गठबंधन को बैकफुट पर लाने की रणनीतिक धमकी.

मुस्लिम वोटों पर जंग: सपा-कांग्रेस के लिए क्यों बने ओवैसी नया सिरदर्द?

ओवैसी भले ही पूरे उत्तर प्रदेश में चुनाव लड़ते रहे हों लेकिन इस बार उनकी रणनीति और मुस्लिम बहुल इलाकों में जुट रही भीड़ ने समाजवादी पार्टी और कांग्रेस के कान खड़े कर दिए हैं. ओवैसी अपनी रैलियों की शुरुआत बहराइच (गाजी सालार मसूद दरगाह), बिजनौर और अब सहारनपुर जैसे मुस्लिम बहुल इलाकों से कर रहे हैं. ये वे इलाके हैं जो पारंपरिक रूप से सपा और कांग्रेस के मजबूत गढ़ माने जाते हैं.

सपा की सबसे बड़ी चिंता

समाजवादी पार्टी लंबे समय से राज्य के मुस्लिम मतदाताओं का प्रतिनिधित्व करती आई है. अगर ओवैसी मुस्लिम वोटों में थोड़ा भी बिखराव करने में कामयाब रहते हैं तो इसका सीधा नुकसान सपा-कांग्रेस गठबंधन को होगा.

सहारनपुर के सांसद इमरान मसूद ओवैसी को अपना 'बड़ा भाई' और 'काबिल इंसान' बता रहे हैं. भले ही वे गठबंधन पर खुलकर नहीं बोल रहे हैं.लेकिन कांग्रेस नेताओं का ओवैसी के प्रति यह सॉफ्ट कॉर्नर सपा के लिए चिंता की बात है.

संसद में मिले राहुल-अखिलेश, सीटों के बंटवारे पर खत्म होगी तल्खी?

यूपी में सपा और कांग्रेस के नेताओं के बीच पिछले कुछ दिनों से बयानबाज़ी और सीटों के गणित को लेकर तनातनी देखने को मिल रही थी. इस बीच संसद सत्र के दौरान राहुल गांधी और अखिलेश यादव की मुलाकात को बेहद अहम माना जा रहा है. हाल ही में इमरान मसूद और यूपी कांग्रेस प्रभारी द्वारा 170 सीटों के दावों और बयानबाज़ी से माहौल गरमाया हुआ था. खबर है कि राहुल और अखिलेश की मुलाकात में इस बात पर सहमति बनी है कि शीर्ष नेतृत्व ही सीटों पर बात करेगा और बयानबाजी रोकी जाएगी.

जल्द सीट बंटवारे का दबाव

अखिलेश यादव चुनाव के ऐन वक्त पर सीटों का बंटवारा चाहते हैं.जबकि कांग्रेस चाहती है कि जल्द से जल्द सीटों की घोषणा हो ताकि असमंजस की स्थिति खत्म हो सके. दोनों नेताओं की इस मुलाकात के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या यूपी में इंडिया गठबंधन की तल्खी कम होती है या सीटों के गणित में यह पेंच और उलझता है.