उत्तर प्रदेश की सियासत में एक बार फिर 'पृथक पूर्वांचल राज्य' की मांग ने जोर पकड़ लिया है. पूर्व केंद्रीय मंत्री डॉ. संजय सिंह ने अमेठी में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान पूर्वांचल को अलग राज्य बनाने का बिगुल फूंक दिया है. उन्होंने स्पष्ट किया कि उत्तर प्रदेश जैसे विशाल राज्य में सुशासन और लोकतंत्र को प्रभावी बनाने के लिए इसका विभाजन अब समय की मांग है.
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'पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच' से शुरू होगी मुहिम
अमेठी के ददन सदन में आयोजित 'खिचड़ी भोज एवं स्नेह मिलन' कार्यक्रम में डॉ. संजय सिंह ने घोषणा की कि वे 'पूर्वांचल राज्य संयुक्त संकल्प मंच' के माध्यम से एक बड़ा आंदोलन शुरू करने जा रहे हैं. उन्होंने पूर्वांचल राज्य की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे सभी संगठनों और सेनानियों को एक मंच पर आने के लिए आमंत्रित किया है.
28 जिले और 8 करोड़ की आबादी: ऐसा होगा नया राज्य
डॉ. संजय सिंह ने पूर्वांचल राज्य का पूरा ढांचा पेश करते हुए बताया कि इसमें उत्तर प्रदेश के 8 मंडलों के 28 जिलों को शामिल करने का प्रस्ताव है.
प्रस्तावित जिले: संजय सिंह के प्रस्ताव में वाराणसी, चंदौली, जौनपुर, गाजीपुर, आजमगढ़, मऊ, बलिया, प्रयागराज, कौशाम्बी, प्रतापगढ़, मिर्जापुर, सोनभद्र, भदोही, अयोध्या, अकबरपुर, सुल्तानपुर, अमेठी, गोंडा, बलरामपुर, बहराइच, श्रावस्ती, गोरखपुर, महाराजगंज, देवरिया, कुशीनगर, बस्ती, सिद्धार्थनगर और संत कबीर नगर शामिल हैं.
आंकड़े: संजय सिंह का कहना है कि करीब 7 करोड़ 98 लाख की आबादी के साथ यह देश का 14वां सबसे बड़ा राज्य बनेगा.
डॉ. संजय सिंह के अनुसार, उत्तर प्रदेश की जनसंख्या विश्व के पांचवें सबसे बड़े देश से भी अधिक है, ऐसे में एक ही केंद्र से पूरे प्रदेश का विकास और प्रशासनिक नियंत्रण संभव नहीं है.
हमें पूर्वांचल दे दीजिए, हम भारत को जापान बना देंगे: अमीता सिंह
पूर्व प्राविधिक शिक्षा मंत्री डॉ. अमीता सिंह ने इस मांग को आर्थिक और भावनात्मक मजबूती देते हुए कहा कि पूर्वांचल प्रशासनिक उपेक्षा का शिकार रहा है. उन्होंने एक नारा देते हुए कहा कि मुंबई हमसे है, सूरत हमसे है, लुधियाना, सिंगापुर, दुबई और मॉरीशस भी हमसे है. जब हमारे लोग पूरी दुनिया को बना सकते हैं, तो हमें हमारा पूर्वांचल राज्य दे दीजिए, हम भारत को जापान बनाने की शक्ति रखते हैं.
पलायन और बाढ़: पूर्वांचल की मुख्य चुनौतियां
रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. अमीता सिंह ने पूर्वांचल की पिछड़ी स्थिति के लिए कुछ प्रमुख कारणों को जिम्मेदार ठहराया. उन्होंने कहा कि औद्योगिक विकास और कृषि सुधार न होने के कारण यहां का कुशल श्रम बाहर जा रहा है. नेपाल से आने वाली नदियों के लिए उचित नीति न होने से क्षेत्र को हर साल बाढ़ का सामना करना पड़ता है. अच्छी चिकित्सा सुविधाओं और उच्च शिक्षा के केंद्रों की भारी कमी.
विदेशी मुद्रा और समृद्धि का केंद्र बन सकता है पूर्वांचल
पूर्वांचल की ताकत को गिनाते हुए डॉ. अमीता सिंह ने बताया कि यह क्षेत्र खनिज संपदा (सोनभद्र-मिर्जापुर), उपजाऊ भूमि और बिजली उत्पादन का बड़ा केंद्र है. अयोध्या, काशी, प्रयागराज जैसे आध्यात्मिक केंद्र और सारनाथ, कुशीनगर, श्रावस्ती जैसे बौद्ध पर्यटन स्थल इस नए राज्य को विदेशी मुद्रा अर्जित करने वाला भारत का सबसे बड़ा स्रोत बना सकते हैं. डॉ. संजय सिंह और डॉ. अमीता सिंह का यह ऐलान आने वाले समय में उत्तर प्रदेश की राजनीति में एक नई बहस और ध्रुवीकरण को जन्म दे सकता है.
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