उत्तर प्रदेश की सियासत में अतीक अहमद और पूजा पाल का नाम एक-दूसरे के विरोधी ध्रुवों के तौर पर लंबे समय से चर्चा में रहा है. अतीक अहमद के बेटे अबान अहमद की झांसी में सड़क हादसे में मौत के बाद एक बार फिर यह सियासी टकराव सुर्खियों में है. अबान के जनाजे में शामिल होने के लिए जेल में बंद उसके दोनों भाई पैरोल पर बाहर आए थे. इस दौरान पुलिस से झड़प, टोल प्लाजा पर बिना टोल दिए काफिले के गुजरने और ओवरस्पीडिंग जैसी बातें सामने आईं, जिसके बाद प्रतापगढ़ और प्रयागराज के कुछ इलाकों में कई गाड़ियों को पुलिस ने सीज किया. इसी घटनाक्रम के बाद पूजा पाल ने अतीक परिवार पर तीखा हमला बोला. वहीं, अतीक परिवार के सदस्यों के चुनावी मैदान में उतरने की चर्चाओं ने पूर्वांचल की सियासत को और दिलचस्प बना दिया है.
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भदोही में पूजा पाल ने अतीक परिवार पर साधा निशाना
भदोही के एक कार्यक्रम में पहुंचीं पूजा पाल ने अतीक परिवार को लेकर तीखी टिप्पणी की. उन्होंने कहा कि अतीक के खून में ही बदमाशी है और ऐसे लोग कभी नहीं सुधर सकते. पूजा पाल ने कहा कि जिन लोगों की सोच लोगों को दुख देने, जमीन हड़पने, कत्लेआम और शोषण करने की रही हो, उनकी सोच जेल में रहने या जेल से बाहर आने से नहीं बदल सकती.
पूजा पाल ने यह भी कहा कि अगर अतीक अहमद को अपने बच्चों को अच्छा आचरण देना था तो वह अपने रहते ऐसा कर सकते थे. उनके मुताबिक, अबान के जनाजे के दौरान भी परिवार के लोगों की ओर से जिस तरह की चीजें सामने आईं, उससे उनकी सोच को लेकर सवाल खड़े होते हैं.
अतीक परिवार के खिलाफ पूजा पाल की सियासत की वजह क्या है?
पूजा पाल की राजनीति की शुरुआत ही अतीक अहमद परिवार के खिलाफ संघर्ष से जुड़ी रही है. पूजा पाल के पति राजू पाल की हत्या अतीक अहमद के भाई अशरफ ने की थी. राजू पाल पहले अतीक के करीबी हुआ करते थे, लेकिन बाद में दोनों के बीच मतभेद हो गए.
अतीक अहमद सांसद बनने के बाद अपने भाई अशरफ को विधायक बनाना चाहते थे. इसी दौरान राजू पाल ने बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और अशरफ को हरा दिया. इसके बाद राजू पाल की हत्या कर दी गई. इसी घटना के बाद पूजा पाल राजनीति में आईं और बसपा के टिकट पर चुनाव लड़ीं. बाद में वह विधायक भी बनीं.
बसपा से सपा और फिर बीजेपी तक पहुंचीं पूजा पाल
बसपा से अलग होने के बाद पूजा पाल समाजवादी पार्टी में चली गईं. हालांकि, 2023 के राज्यसभा चुनाव में उन्होंने बीजेपी के पक्ष में मतदान किया. इसके बाद उनकी सियासी दिशा बदल गई.
पूजा पाल विधानसभा में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के साथ भी खड़ी नजर आईं. उन्होंने अतीक अहमद के खिलाफ सरकार की कार्रवाई की तारीफ की और कहा कि अतीक को मिट्टी में मिलाने वालों का वह साधुवाद करेंगी.
2024 के लोकसभा चुनाव में भी पूजा पाल बीजेपी के लिए प्रचार करती नजर आईं. इसके बाद समाजवादी पार्टी ने उन्हें पार्टी से बाहर कर दिया. फिलहाल वह बीजेपी की प्रदेश उपाध्यक्ष और चायल सीट से विधायक हैं.
क्या अतीक के गढ़ से चुनाव लड़ सकती हैं पूजा पाल?
अब चर्चा इस बात की भी है कि पूजा पाल उस सीट से अपनी दावेदारी पेश कर सकती हैं, जहां से कभी अतीक अहमद चुनाव लड़ा करते थे.
पूर्वांचल की राजनीति में पूजा पाल की भूमिका को दो तरह से देखा जा रहा है. एक तरफ उन्हें पाल समुदाय के बीच बीजेपी के चेहरे के तौर पर देखा जा रहा है, वहीं दूसरी ओर अतीक अहमद के खिलाफ उनकी राजनीति और महिला सुरक्षा का मुद्दा भी उनके राजनीतिक आधार का हिस्सा बताया जा रहा है.
इन समीकरणों के चलते पूजा पाल को हिंदू वोट, महिला सुरक्षा और अति पिछड़ा यानी गैर-यादव पिछड़ा वोट के समीकरण में फिट माना जा रहा है.
दूसरी तरफ अतीक के बेटों के चुनाव लड़ने की चर्चा
इसी बीच अतीक अहमद के बेटों के चुनाव लड़ने की चर्चा भी तेज है. दावा है कि जेल में बंद बेटे को एआईएमआईएम चुनाव मैदान में उतार सकती है. हालांकि, अभी पार्टी की ओर से ऐसी कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है.
इस चर्चा के पीछे अतीक परिवार के एआईएमआईएम से पुराने राजनीतिक संबंधों को वजह माना जा रहा है. अतीक की पत्नी पहले बसपा में शामिल हुई थीं और बाद में एआईएमआईएम के साथ चली गईं. परिवार के कई सदस्य भी एआईएमआईएम से जुड़े रहे हैं.
अबान के जनाजे के दौरान अतीक के बेटों की एआईएमआईएम प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली से मुलाकात का भी जिक्र सामने आया. शौकत अली के मुताबिक, अतीक के बेटों ने असदुद्दीन ओवैसी को सलाम कहने का संदेश दिया था.
क्या 2027 में पूजा पाल बनाम अतीक के बेटों की लड़ाई होगी?
अभी यह साफ नहीं है कि 2027 के विधानसभा चुनाव में पूजा पाल और अतीक परिवार के बीच सीधा चुनावी मुकाबला होगा या नहीं. एआईएमआईएम की ओर से अतीक के किसी बेटे को टिकट देने की आधिकारिक घोषणा भी नहीं हुई है.
लेकिन पूर्वांचल में चर्चा जरूर तेज है कि आने वाले चुनाव में पूजा पाल बनाम अतीक परिवार की सियासी लड़ाई दिखाई दे सकती है. ऐसे में सवाल यही है कि क्या यह टकराव पूर्वांचल की राजनीति को नया रंग देगा और क्या पूजा पाल एक बड़े राजनीतिक चेहरे के तौर पर उभरेंगी?
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