मायावती ने अंटू मिश्रा को क्यों निकाला? ब्राह्मण चेहरे पर एक्शन के पीछे क्या है कहानी

कुमार अभिषेक

• 09:30 AM • 14 Aug 2026

मायावती ने बसपा के बड़े ब्राह्मण चेहरे अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से बाहर कर दिया. जानिए निष्कासन की वजह, अशोक सिद्धार्थ से करीबी और दूसरी पार्टियों से संपर्क की पूरी कहानी.

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यूपी Tak का खास शो 'आज का यूपी' है. इसमें हम राज्य की तीन बड़ी खबरों का विश्लेषण करते हैं. पहली बड़ी खबर बसपा से जुड़ी है, जहां मायावती ने अपने बड़े ब्राह्मण चेहरे अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से बाहर कर दिया है. दूसरी अहम बात यह कि अंटू मिश्रा को हटाने के पीछे अशोक सिद्धार्थ से उनकी करीबी और दूसरी पार्टियों से कथित संपर्क की चर्चा है. वहीं तीसरी बड़ी कहानी यह है कि बसपा प्रमुख एक तरफ ब्राह्मण वोटर्स को साधने की कोशिश कर रही हैं, लेकिन दूसरी तरफ लगातार कई नेताओं को पार्टी से बाहर का रास्ता दिखा रही हैं. ऐसे में सवाल है कि अंटू मिश्रा पर कार्रवाई के पीछे आखिर पूरी कहानी क्या है और मायावती के इस फैसले का बसपा की राजनीति पर क्या असर पड़ सकता है.

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अंटू मिश्रा को मायावती ने पार्टी से क्यों निकाला?

बसपा प्रमुख मायावती ने अनंत मिश्रा उर्फ अंटू मिश्रा को पार्टी से बाहर कर दिया है. मायावती ने इसकी वजह पार्टी विरोधी गतिविधियों और दूसरी पार्टियों के साथ संपर्क में होने को बताया है.

अंटू मिश्रा बसपा का जाना-पहचाना ब्राह्मण चेहरा रहे हैं. वह मायावती सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं और बसपा के वरिष्ठ नेता सतीश चंद्र मिश्रा के करीबी माने जाते रहे हैं. ऐसे में उनके निष्कासन को इसलिए भी अहम माना जा रहा है क्योंकि बसपा इस समय ब्राह्मण वोटर्स को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

अंटू मिश्रा को हटाए जाने की तत्काल वजह उनकी पूर्व राज्यसभा सांसद अशोक सिद्धार्थ से करीबी भी बताई जा रही है. हाल ही में मायावती ने अशोक सिद्धार्थ को भी पार्टी से बाहर किया था. ऐसे में माना जा रहा है कि अशोक सिद्धार्थ के करीबी नेताओं पर भी मायावती की नजर है.

क्या दूसरी पार्टियों के संपर्क में थे अंटू मिश्रा?

अंटू मिश्रा के दूसरी पार्टियों के संपर्क में होने की चर्चा भी इस पूरे मामले में महत्वपूर्ण है. जानकारी के मुताबिक, वह पहले भी भाजपा में जाने की कोशिश कर चुके हैं.

2024 में अंटू मिश्रा भाजपा कार्यालय पहुंचे थे और उनकी जॉइनिंग की तैयारी भी हो गई थी. मंच पर भाजपा के वरिष्ठ नेता मौजूद थे और उनके नाम का ऐलान होना था. लेकिन आखिरी वक्त में दिल्ली से फोन आने के बाद उनकी जॉइनिंग रुक गई.

इसके बाद समाजवादी पार्टी से भी उनकी बातचीत की चर्चा सामने आती रही. हालांकि वहां भी उनके लिए जगह नहीं बन सकी. हाल के दिनों में उनके भाजपा से दोबारा संपर्क बढ़ाने की बात कही जा रही थी.

अंटू मिश्रा कानपुर के रहने वाले हैं और आर्य नगर विधानसभा सीट से चुनाव लड़ने की इच्छा भी बताई जा रही है. इस सीट से इस समय समाजवादी पार्टी के अमिताभ बाजपेयी विधायक हैं. इसी वजह से कहा जा रहा है कि अंटू मिश्रा ऐसी पार्टी की तलाश में थे, जहां उन्हें संगठन में जगह के साथ चुनाव लड़ने का मौका भी मिल सके.

कांग्रेस से भी उनके संपर्क में होने की चर्चा रही है. हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि उन्हें किस पार्टी से चुनाव लड़ने का मौका मिल सकता है.

ब्राह्मण वोट पर फोकस, फिर ब्राह्मण चेहरे पर एक्शन क्यों?

अंटू मिश्रा को ऐसे समय में बसपा से बाहर किया गया है, जब पार्टी ब्राह्मण वोटर्स पर खासा फोकस कर रही है. हाल में जिन विधानसभा सीटों के लिए बसपा ने उम्मीदवारों का ऐलान किया है, उनमें कई ब्राह्मण चेहरे शामिल हैं.

शादाबाद-हाथरस, जालौन और जौनपुर में पार्टी ने ब्राह्मण उम्मीदवारों को मैदान में उतारा है. इससे संकेत मिलता है कि बसपा ब्राह्मण वोटर्स को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रही है.

ऐसे में पार्टी के एक प्रमुख ब्राह्मण चेहरे को बाहर किए जाने का फैसला चर्चा में है. इससे पहले बसपा ने नकुल दुबे को पार्टी से निकाला था. उन्हें बाहर किए करीब दो साल से ज्यादा समय हो चुका है. वहीं रामवीर उपाध्याय को पार्टी से निकाले करीब छह-सात साल हो चुके हैं.

अंटू मिश्रा का मामला इसलिए भी अलग माना जा रहा है क्योंकि वह मायावती सरकार में मंत्री रहे हैं और सतीश चंद्र मिश्रा के करीबी रहे हैं.

मायावती लगातार नेताओं को दिखा रही हैं बाहर का रास्ता

अंटू मिश्रा से पहले भी मायावती कई बड़े नेताओं को पार्टी से बाहर कर चुकी हैं. हाल में पूर्व राज्यसभा सदस्य अशोक सिद्धार्थ को पार्टी विरोधी गतिविधियों और अनुशासनहीनता के आरोप में बाहर किया गया.

इसके अलावा सुरेंद्र सागर, इमरान मसूद, दानिश अली, लालजी वर्मा, नसीमुद्दीन सिद्दीकी, स्वामी प्रसाद मौर्य, इंद्रजीत सरोज और राम अचल राजभर जैसे नेता भी अलग-अलग समय पर बसपा से बाहर हो चुके हैं.

इनमें से कई नेताओं ने बाद में दूसरी पार्टियों में राजनीतिक जगह बनाई. ऐसे में यह भी सवाल उठता है कि नेताओं के लगातार पार्टी छोड़ने या निकाले जाने के बावजूद मायावती अपने फैसलों में बदलाव क्यों नहीं करतीं.

अंटू मिश्रा के मामले में भी अभी उनकी तरफ से पूरी प्रतिक्रिया सामने आनी बाकी है. बताया जा रहा है कि वह जल्द ही इस मामले पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपनी स्थिति स्पष्ट कर सकते हैं.

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