'जिम्मेदार लोगों पर भी हो कड़ी कानूनी कार्रवाई'… जंतर-मंतर प्रदर्शन के बीच बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने सरकार को दी नसीहत!

आशुतोष चौबे

• 10:09 AM • 20 Jul 2026

संसद के मानसून सत्र के बीच जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर बसपा प्रमुख मायावती ने सरकारों को नसीहत दी है. एक्स पर पोस्ट कर उन्होंने कहा कि जंतर-मंतर से संसद तक बने तनावपूर्ण माहौल का समाधान सरकारें समझदारी और सहानुभूति के साथ निकालें.

Mayawati On Jantar Mantar Protest

Mayawat On Jantar Mantar Protest (Photo Enhanced By AI)

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Mayawati Jantar Mantar Protest: संसद के मानसून सत्र की शुरुआत के साथ दिल्ली के जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन को लेकर बहुजन समाज पार्टी (बसपा) प्रमुख और उत्तर प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती ने केंद्र और राज्य सरकारों को अहम नसीहत दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लंबी पोस्ट साझा करते हुए कहा कि संसद से लेकर सड़कों और जंतर-मंतर तक कई ज्वलंत मुद्दों को लेकर टकराव की स्थिति बनी हुई है. ऐसे हालात में सरकारों को बेहतर समझदारी दिखाते हुए समाधान निकालना चाहिए. साथ ही उन्होंने युवाओं की समस्याओं, पेपर लीक, शिक्षा व्यवस्था और रोजगार जैसे मुद्दों पर भी विस्तार से अपनी बात रखी.

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सरकारें सूझबूझ दिखाएं

मायावती ने अपनी पोस्ट में लिखा, 'आज से जब संसद का मानसून सत्र शुरू हो रहा है, सदन से लेकर सड़कों व दिल्ली के जन्तर-मन्तर तक में विभिन्न ज्वलन्त मुद्दों को लेकर ज़बरदस्त टकराव की स्थिति है, जिसे देश के विकट राजनीतिक, आर्थिक एवं सामाजिक हालात के मद्देनज़र ज़रूर बेहतर सूझबूझ से टाला जाना चाहिये.' उन्होंने कहा कि मौजूदा परिस्थितियों में सरकारों की जिम्मेदारी है कि हालात को टकराव की बजाय संवाद और समझदारी से संभाला जाए.

युवाओं की चिंता पर जताई फिक्र

बसपा प्रमुख ने कहा कि मेडिकल समेत कई अखिल भारतीय परीक्षाओं और राज्यों की भर्ती परीक्षाओं में पेपर लीक तथा अन्य गड़बड़ियों के कारण युवाओं में भारी असंतोष है. उन्होंने लिखा, 'पेपरलीक/गड़बड़ी आदि के कारण रद्द होने की अनिश्चितता से ख़ासकर युवा वर्ग व बेरोज़गार लोग लगातार काफी ज़्यादा परेशान हैं, जो विभिन्न जगहों पर व्यक्त किये जा रहे उनके आक्रोश व आन्दोलन से भी प्रकट है.' मायावती ने इसे देश और जनहित से जुड़ा गंभीर विषय बताते हुए सरकारों से तत्काल सख्त कदम उठाने की मांग की.

मायावती ने अपनी पोस्ट में कहा कि केवल गड़बड़ियों की जांच ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए जिम्मेदार लोगों की जवाबदेही भी तय होनी चाहिए. उन्होंने लिखा, 'परीक्षा व्यवस्थाओं से जुड़े उच्च पदों पर बैठे लोगों के विरुद्ध भी कड़ी क़ानूनी सजा हो ताकि देश की तरक्की की नींव युवा पीढ़ी का भविष्य इस प्रकार की अनिश्चितता और अंधकार से आगे बच पाये.' उनका कहना है कि युवाओं का भविष्य सुरक्षित रखने के लिए परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही बेहद जरूरी है.

शिक्षा व्यवस्था मजबूत करने की दी सलाह

पूर्व मुख्यमंत्री ने शिक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि अच्छे सरकारी स्कूलों और गुणवत्तापूर्ण पढ़ाई की कमी के कारण निजी स्कूलों और कोचिंग संस्थानों का तेजी से विस्तार हो रहा है. उन्होंने लिखा, 'देश का युवा वर्ग व उनका परिवार ज़बरदस्त महंगाई के इस दौर में भी अपना पेट काटकर अपने स्तर से पूरा जी-जान लगाकर आगे बढ़ने हेतु प्रतिबद्ध है.' उन्होंने कहा कि सरकारों को कोचिंग संस्थानों पर भ्रष्टाचार-मुक्त निगरानी रखने के साथ-साथ प्राथमिक से उच्च शिक्षा तक सरकारी शिक्षा व्यवस्था को मजबूत करने पर विशेष ध्यान देना चाहिए.

सम्मानजनक भविष्य की उठाई बात

मायावती ने कहा कि युवा केवल अस्थायी या आउटसोर्सिंग की नौकरियों तक सीमित नहीं रहना चाहते. उन्होंने लिखा, 'वे लोग आउटसोर्सिंंग की शोषणकारी छोटी-मोटी नौकरी आदि से आगे बढ़कर स्थाई व स्वाभिमानी नौकरी में अपना भविष्य बनाना चाहते हैं ताकि इज्जत से दो वक्त की रोटी कमाकर अपना व अपने परिवार का पेट पाल सकें.' उन्होंने सरकारों से शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने, पर्याप्त बजट उपलब्ध कराने और युवाओं के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में ईमानदारी से काम करने की अपील की.

जंतर-मंतर आंदोलन पर सहानुभूति दिखाने की अपील

अपनी पोस्ट के अंत में मायावती ने कहा कि अगर शिक्षा, रोजगार और युवाओं से जुड़े मुद्दों पर समय रहते गंभीरता से काम किया जाए तो ऐसे आंदोलनों की नौबत कम हो सकती है. उन्होंने लिखा, 'अगर इन बातों पर तत्काल ज़रूरी ध्यान दिया जाये तो जन्तर-मन्तर पर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के हो रहे आन्दोलन जैसी कार्रवाईयों के लिये लोगों में भी ख़ासकर युवा पीढ़ी को बाध्य नहीं होना पड़ेगा. सरकार इनके प्रति सहानुभूति का रवैया अपनाकर स्थिति का सही समाधान करें तो यह उचित होगा.' उनके इस बयान को जंतर-मंतर पर जारी प्रदर्शन और युवाओं के मुद्दों को लेकर सरकार के लिए एक अहम राजनीतिक संदेश के तौर पर देखा जा रहा है.