SIR की वजह से क्या टेंशन में आ गए हैं अखिलेश यादव? सपा को अब इस बात का 'डर'

UP News: क्या 2.89 करोड़ वोटरों के नाम कटने से बीजेपी का शहरी किला ढह जाएगा? लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद में क्यों परेशान है सत्ता पक्ष? जानें SIR सपा को कैसे नुकसान पहुंचा सकता है.

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कुमार अभिषेक

01 Jan 2026 (अपडेटेड: 01 Jan 2026, 10:42 AM)

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UP News: यूपी Tak के खास शो आज का यूपी में पेश है उत्तर प्रदेश की उन तीन खबरों का विश्लेषण जो प्रदेश की सियासत और आम जनता से सीधे जुड़ी हैं. पहली खबर उस अलार्मिंग आंकड़े की है, जिसने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ से लेकर भाजपा संगठन तक को चिंता में डाल दिया है. लखनऊ, आगरा और गाजियाबाद जैसे बीजेपी के गढ़ों से लाखों वोटर लिस्ट से बाहर हो गए हैं. दूसरी खबर चुनाव आयोग के उस फैसले पर है जिसने 1 जनवरी से शुरू होने वाली प्रक्रिया को 6 जनवरी तक टाल दिया है. आखिर क्यों आयोग को 15 हजार नए बूथ बनाने पड़ रहे हैं? और तीसरी खबर में हम समझेंगे कि SIR के दौरान क्या शहरों से गायब हुए ये वोटर सिर्फ बीजेपी ही नहीं, बल्कि समाजवादी पार्टी का भी खेल बिगाड़ सकते हैं?
 

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मतदाता सूची से 2.89 करोड़ वोटर बाहर, बीजेपी के शहरी गढ़ में मची खलबली

उत्तर प्रदेश में चल रहे विशेष मतदाता पुनरीक्षण (SIR) अभियान के जो आंकड़े सामने आए हैं उसने सत्ताधारी दल बीजेपी को हैरान कर दिया है. अभियान की शुरुआत में करीब 2.91 लाख लोग ऐसे मिले जो या तो मृत थे, डुप्लीकेट थे या फिर स्थायी रूप से शिफ्ट हो चुके थे. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की चेतावनी और संगठन की तमाम कोशिशों के बावजूद चुनाव आयोग मात्र 2 लाख वोटरों को ही वापस ढूंढ पाया है. अब भी 2.89 करोड़ लोग मतदाता सूची से बाहर हो रहे हैं. 

सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति बीजेपी के उन गढ़ों में है जहां वह क्लीन स्वीप करती थी:

  • लखनऊ: यहां सबसे ज्यादा 12 लाख नाम कटे हैं. 
  • आगरा: यहां 23% यानी करीब 8.5 लाख वोटरों के नाम हटे हैं. 
  • गाजियाबाद: 29% यानी लगभग 8.11 लाख वोटरों की कमी आई है. 
  • प्रयागराज: यहां भी करीब 11.5 लाख (24%) वोट कट रहे हैं. 
  • बीजेपी को डर है कि शहरी इलाकों से इतनी बड़ी तादाद में वोटों का कम होना सीधे तौर पर उसके चुनावी मार्जिन पर असर डालेगा.

चुनाव आयोग ने क्यों बढ़ाई तारीख? अब 6 जनवरी से दर्ज होंगी आपत्तियां

SIR अभियान के तहत दावों और आपत्तियों की प्रक्रिया जो 1 जनवरी से शुरू होनी थी, उसे अब बढ़ाकर 6 जनवरी कर दिया गया है. चुनाव आयोग का मानना है कि इतनी बड़ी संख्या में नाम कटने के बाद आपत्तियों और नए नाम जुड़वाने वालों की भारी भीड़ उमड़ेगी.

इस भीड़ को मैनेज करने के लिए आयोग 15000 नए बूथों का निर्माण कर रहा है. अब नियम यह होगा कि एक बूथ पर अधिकतम 1200 वोटर ही होंगे. दावों और आपत्तियों का काम 6 जनवरी से 6 फरवरी तक चलेगा जबकि 6 मार्च 2026 को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी.

पुश्तैनी गांव से मोह और शहरों से दूरी! सपा-बीजेपी दोनों की बढ़ी टेंशन

विश्लेषण में यह बात सामने आई है कि जो लोग शहरों में रह रहे हैं वे अपना नाम शहर की वोटर लिस्ट में शामिल कराने के बजाय अपने पुश्तैनी गांव को प्राथमिकता दे रहे हैं. जमीन-जायदाद गांव में होने के कारण लोग अपना वोट वहीं सुरक्षित रखना चाहते हैं. 

हालांकि शुरू में अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी इस आंकड़े से खुश दिख रहे थे, लेकिन अब सपा के भीतर भी डर है. सपा नेताओं को आशंका है कि हर बूथ पर औसतन 100 से 200 वोट कम हो रहे हैं, जिसका मतलब है कि नुकसान किसी एक पार्टी का नहीं बल्कि सबका हो सकता है. उत्तर प्रदेश इकलौता ऐसा राज्य है जहां करीब 19% वोटरों के नाम कटने वाले हैं जो सियासत की किसी भी प्रयोगशाला के लिए एक बड़ा वज्रपात साबित हो सकता है. 

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