रामपुर में सपा की बढ़ सकती हैं मुश्किलें? पत्रकारों ने समझा दिया पूरा समीकरण

आमिर खान

• 10:15 AM • 08 Oct 2026

Mood kya hai Rampur: रामपुर में 2027 चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज है.पांच सीटों के बदले समीकरण, आजम खान परिवार की 15 सीटों की दावेदारी, धनराज नाथवानी को टिकट और मुस्लिम वोटरों की नाराजगी ने सपा के सामने नई चुनौतियां खड़ी कर दी हैं.

Mood kya hai Rampur

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में रामपुर हमेशा से ही सत्ता के शक्ति-संतुलन का केंद्र रहा है. 2027 के विधानसभा चुनावों की आहट के साथ ही रामपुर की पांचों विधानसभा सीटों को लेकर सियासी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. कभी पूर्व मंत्री आजम खान का गढ़ माने जाने वाले रामपुर में आज स्थितियां पूरी तरह बदल चुकी हैं. 5 में से 3 सीटों पर बीजेपी, एक पर अपना दल (एस) और महज एक सीट (चमरोवा) पर समाजवादी पार्टी का कब्जा है.

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इस बीच आजम खान की पत्नी तजीन फातिमा द्वारा अखिलेश यादव से 15 सीटों की मांग किए जाने की खबरों और राज्यसभा चुनाव में मुस्लिम नेताओं के बजाय धनराज नाथवानी को तरजीह दिए जाने से मुस्लिम मतदाताओं में खासी नाराजगी देखी जा रही है. वरिष्ठ पत्रकारों के विश्लेषण के मुताबिक, अगर सपा ने आज़म खान की शर्तों को नहीं माना तो रामपुर समेत पूरे पश्चिमी यूपी में 'सपा का खेल' बिगड़ सकता है.

रामपुर की 5 विधानसभा सीटों का वर्तमान सियासी गणित

रामपुर जिले में कुल 5 विधानसभा सीटें हैं जिनका मौजूदा राजनीतिक समीकरण इस प्रकार है.

रामपुर सदर: भारतीय जनता पार्टी (BJP)

बिलासपुर: भारतीय जनता पार्टी (BJP)

मिलक: भारतीय जनता पार्टी (BJP)

स्वार: अपना दल (सोनेलाल)

चमरोवा: समाजवादी पार्टी (SP)

एक दौर था जब रामपुर की सभी सीटों पर कांग्रेस का दबदबा हुआ करता था जिसके बाद आजम खान के दौर में सभी सीटों पर सपा का परचम लहराया. लेकिन आजम खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को मुकदमों में सजा होने और चुनाव लड़ने पर अयोग्यता के कानूनी शिकंजे के चलते परिस्थितियां बिल्कुल उलट चुकी हैं.

'पांडवों ने 5 गांव मांगे थे...': आज़म खान परिवार की 15 सीटों पर दावेदारी

राजनीतिक चर्चाओं के मुताबिक, आजम खान की पत्नी डॉ. तज़ीन फातिमा ने सपा प्रमुख अखिलेश यादव से मुलाकात कर रामपुर और आसपास के जिलों की करीब 15 सीटों पर अपनी पसंद के उम्मीदवार उतारने की मांग रखी है. वरिष्ठ पत्रकारों का कहना है कि यह "नई समाजवादी पार्टी" है जहां मुलायम सिंह यादव के दौर जैसे फैसले अब नहीं होते.हालांकि रामपुर और रोहिलखंड क्षेत्र में आजम खान का सियासी कद भले ही किसी को जिताने की स्थिति में न हो लेकिन वे सपा के खेल को बिगाड़ने (हराने) का माद्दा जरूर रखते हैं. अगर अखिलेश यादव ने उनकी बात नहीं मानी तो सपा के भीतर बड़ा बिखराव तय माना जा रहा है.

'शेरवानी से नाथवानी' पर मुस्लिम वोटर्स में उबाल

राज्यसभा चुनाव में सलीम शेरवानी जैसे कद्दावर मुस्लिम नेताओं की अनदेखी कर रिलायंस ग्रुप से जुड़े धनराज नाथवानी को सपा उम्मीदवार बनाए जाने से मुस्लिम समाज में गहरी नाराजगी है. रामपुर के वरिष्ठ पत्रकारों के अनुसार  उत्तर प्रदेश में करीब 20% मुस्लिम आबादी के बावजूद सपा की तरफ से राज्यसभा में केवल एक मुस्लिम सांसद हैं, जबकि 9% आबादी वाले यादव समाज के कई प्रतिनिधि हैं.

मुस्लिम समुदाय में यह भावना घर कर रही है कि सपा उन्हें सिर्फ "ब्लैकमेल" कर वोट बैंक की तरह इस्तेमाल करती है. यही वजह है कि पिछले कुछ चुनावों में मुस्लिम मतदाताओं ने खामोशी इख्तियार की है या सपा के खिलाफ भी मतदान किया है.

रामपुर सपा में गुटबाजी: सांसद बनाम आज़म खान कैंप

रामपुर में समाजवादी पार्टी अंदरूनी गुटबाजी से बुरी तरह जूझ रही है. एक तरफ स्थानीय सांसद का गुट है तो दूसरी तरफ आजम खान के वफादारों और संगठन के जिलाध्यक्षों की टीम है. हाल ही में रामपुर में हुई सपा-कांग्रेस की संयुक्त प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा जिलाध्यक्ष और नगर अध्यक्ष नदारद रहे जिसे लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं ने सांसद की कार्यशैली पर सवाल उठाए हैं.

कानूनी अयोग्यता और 2027 का अंतिम समीकरण

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 8(3) के तहत सजायाफ्ता होने के कारण आज़म खान और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म के सीधे चुनाव लड़ने की राह बेहद कठिन है, जब तक कि सुप्रीम कोर्ट से उनकी सजा पर रोक न मिल जाए. ऐसी स्थिति में सपा को नए चेहरों पर दांव लगाना होगा.

कुल मिलाकर रामपुर में मुकाबला बीजेपी बनाम विपक्षी गठबंधन (सपा-कांग्रेस) के बीच ही होगा. लेकिन अगर आजम खान का असंतोष और मुस्लिम वोटर्स की नाराजगी बरकरार रही तो अखिलेश यादव के 'PDA' (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को रामपुर से लेकर पूरे पश्चिमी यूपी में बड़ा नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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