पूर्वांचल की सबसे हॉट विधानसभा सीटों में शुमार बलिया सदर इन दिनों जबरदस्त राजनीतिक चर्चाओं में है. वजह हैं यहां के वर्तमान विधायक और योगी सरकार में परिवहन मंत्री दयाशंकर सिंह. कभी अपने तीखे तेवरों, तो कभी अधिकारियों और पीडब्ल्यूडी विभाग पर नाराजगी को लेकर सुर्खियों में रहने वाले दयाशंकर सिंह क्या अपनी सीट बचा पाएंगे? क्या बीजेपी आलाकमान अपने इस कद्दावर मंत्री पर दोबारा दांव लगाएगा या फिर इस सीट से पूर्व में विधायक रहे पूर्व मंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला की वापसी होगी? वहीं दूसरी तरफ सपा के कद्दावर नेता रहे नारद राय के बीजेपी में जाने के बाद खाली हुई जगह को भरने के लिए समाजवादी पार्टी में दावेदारों की लंबी कतार लग गई है.
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दयाशंकर सिंह vs आनंद स्वरूप शुक्ला
बलिया सदर सीट पर बीजेपी के भीतर ही टिकट को लेकर कड़ी खींचतान देखने को मिल रही है.
दयाशंकर सिंह का दांव: दयाशंकर सिंह का सबसे मजबूत पक्ष उनका सरकार में मंत्री होना और बीजेपी संगठन में लंबे समय तक काम करने का अनुभव है. छात्र राजनीति से निकले दयाशंकर को संगठन का मजबूत आदमी माना जाता है. 2022 में उनकी पत्नी स्वाति सिंह का टिकट कटने के बाद उन्हें बलिया से मौका मिला था, जिसे उन्होंने जीत में बदला.
आनंद स्वरूप शुक्ला की दावेदारी: दयाशंकर सिंह के सामने सबसे बड़ी चुनौती 2017 में इसी सीट से विधायक और मंत्री रहे आनंद स्वरूप शुक्ला पेश कर रहे हैं. 2022 में उनका टिकट काटकर बैरिया भेजा गया था जहां उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. अब वह फिर से बलिया नगर क्षेत्र में सक्रिय हैं और अपनी पुरानी सीट पर वापसी की पुरजोर कोशिश कर रहे हैं.
अन्य दावेदार: इनके अलावा रमेश सिंह 'फौजी' और शुभम नारायण सिंह उर्फ सुरेंद्र सिंह जैसे नेता भी होर्डिंग्स और सोशल मीडिया के जरिए अपनी दावेदारी ठोक रहे हैं.
नारद राय का 'फैक्टर' और बीजेपी का नया प्रयोग
सपा के पूर्व कद्दावर नेता नारद राय अब बीजेपी के पाले में हैं. चर्चा यह भी है कि क्या बीजेपी बलिया सदर सीट पर किसी नए समीकरण के तहत नारद राय को प्रत्याशी बना सकती है? हालांकि कहा जा रहा है कि नारद राय किसी अन्य सीट से भी तैयारी में हैं. लेकिन राजनीति में किसी भी प्रयोग से इनकार नहीं किया जा सकता.
नारद राय के जाने के बाद 6-6 दावेदार रेस में
नारद राय के बीएसपी और फिर बीजेपी में चले जाने से समाजवादी पार्टी में बलिया सदर का मैदान पूरी तरह खुल गया है. इस खाली जगह को भरने के लिए सपा और इंडिया गठबंधन के नेताओं में होड़ मच गई है.
मजबूत दावेदार: पूर्व पालिकाध्यक्ष और 2017 में प्रत्याशी रहे लक्ष्मण गुप्ता, दो बार की पूर्व विधायक मंजू सिंह और पूर्व छात्र नेता अनिल राय (जो बीएसपी से सपा में आए हैं) मजबूती से डटे हैं.
युवा व नए चेहरे: सपा सांसद के करीबी हिमांशु त्रिपाठी, बैंकर व होटल व्यवसायी कामेश्वर सिंह, संजय उपाध्याय और अनिल राय लगातार क्षेत्र में सक्रिय हैं.
सपा का धर्मसंकट: सपा को अब यह तय करना है कि वह इस सीट पर ब्राह्मण, ठाकुर या किसी पिछड़े वर्ग के उम्मीदवार को उतारेगी, या फिर यह सीट इंडिया गठबंधन के तहत कांग्रेस के खाते में जाएगी.
बीएसपी का 'ब्राह्मण कार्ड' खेलने का प्लान
बहुजन समाज पार्टी (BSP) भी इस लड़ाई को त्रिकोणीय बनाने की पूरी तैयारी में है. स्थानीय सियासी गलियारों की मानें तो बीएसपी यहां से सुमंत पांडे पर दांव लगाकर 'ब्राह्मण कार्ड' खेलने जा रही है.
बलिया सदर का सियासी पारा चढ़ चुका है. एक तरफ जहां मंत्री दयाशंकर सिंह के सामने अपनी साख और सीट बचाने की चुनौती है. वहीं बीजेपी के अंदरूनी दावेदार और सपा-कांग्रेस का भारी-भरकम कुनबा इस मुकाबले को बेहद दिलचस्प बना रहा है.
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