UGC विवाद पर बृजभूषण अभी बोलने के लिए सोचेंगे लेकिन सांसद बेटे प्रतीक ने तो धागे ही खोल दिए! ये सब कह दिया

गौरांशी श्रीवास्तव

27 Jan 2026 (अपडेटेड: 27 Jan 2026, 01:48 PM)

Brij Bhushan and Prateek on UGC: यूजीसी के नए नियमों पर जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल हुआ तो उन्होंने इसे कहा कि वो बिना पूरी जानकारी के कोई बयान नहीं देंगे. वहीं उनके बेटे और गोंडा के सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर इस बिल को सामान्य वर्ग के खिलाफ एक साजिश करार दिया है.

Brijbhushan Sharan singh and Prateek Bhushan

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Brij Bhushan and Prateek on UGC: विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी रेगुलेशंस 2026' ने उत्तर प्रदेश की राजनीति में नया तूफान खड़ा कर दिया है.  यूजीसी के नए नियमों पर जब पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह से सवाल हुआ तो उन्होंने इसे कहा कि वो बिना पूरी जानकारी के कोई बयान नहीं देंगे. वहीं उनके बेटे और गोंडा के सदर विधायक प्रतीक भूषण सिंह ने सोशल मीडिया पर इस बिल को सामान्य वर्ग के खिलाफ एक साजिश करार दिया है. प्रतीक का तर्क है कि भारतीय समाज के एक वर्ग को 'ऐतिहासिक अपराधी'बनाकर वर्तमान में निशाना बनाया जा रहा है.

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UGC के लेकर बृजभूषण शरण सिंह और प्रतीक की अलग राय

पूर्व सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा कि 'यूजीसी एक बड़ा और गंभीर विषय है. मैं इसका अध्ययन कर रहा हूं.जो कुछ भी बोलूंगा सोच-समझकर बोलूंगा. क्योंकि यह समाज से जुड़ा मुद्दा है. सामंजस्य निकलना जरूरी है.' वहीं उनके बेटे प्रतीक ने इस नियम के खिलाफ बिगुल फूंकते हुए लिखा कि 'इतिहास के दोहरे मापदंडों पर अब गहन विवेचना होनी चाहिए, जहां बाहरी आक्रांताओं और उपनिवेशी ताकतों के भीषण अत्याचारों को अतीत की बात कहकर भुला दिया जाता है. जबकि भारतीय समाज के एक वर्ग को निरंतर ऐतिहासिक अपराधी के रूप में चिन्हित करके वर्तमान में प्रतिशोध का निशाना बनाया जाता है.'

क्या है यूजीसी का नया नियम

यूजीसी ने 13 जनवरी 2026 को 'प्रमोशन ऑफ इक्विटी इन हायर एजुकेशन इंस्टीट्यूशन रेगुलेशंस' लागू किया है. एससी-एसटी (SC/ST) की तरह अब ओबीसी छात्रों को भी जातिगत भेदभाव के खिलाफ सुरक्षा मिलेगी. हर यूनिवर्सिटी और कॉलेज में एक समर्पित सेल बनाना होगा जो इन वर्गों की शिकायतों का निपटारा करेगा. एक कमेटी बनेगी जिसमें ओबीसी, एससी-एसटी, महिला और दिव्यांग प्रतिनिधि शामिल होंगे जो हर 6 महीने में रिपोर्ट सौंपेगी. यूजीसी द्वारा साल 2026 की शुरुआत में जारी किए गए नए नियमों को लेकर देश भर में एक बड़ी बहस छिड़ गई है.

इस नियम का विरोध करने वाले छात्रों और शिक्षकों के पास तीन मुख्य तर्क हैं. विरोधियों का मानना है कि शिकायतकर्ता पर दंड का प्रावधान न होने से सामान्य वर्ग के मेधावी छात्रों के खिलाफ झूठी शिकायतें हो सकती हैं जिससे उनका करियर बर्बाद हो सकता है. इक्विटी कमेटी में सामान्य वर्ग के लिए कोई अनिवार्य प्रतिनिधित्व नहीं रखा गया है जिससे उन्हें पक्षपाती फैसलों का डर है. वहीं तीसरा तर्क दिया जा रहा है कि यह नियम लागू होते ही सामान्य वर्ग के छात्रों को पहले से ही शोषक या अपराधी की श्रेणी में खड़ा कर देता है.