प्रशासन से विवाद के बीच अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को केशव प्रसाद मौर्य ने कहा पूज्य शंकराचार्य जी, क्या खत्म होगी नाराजगी?

समर्थ श्रीवास्तव

23 Jan 2026 (अपडेटेड: 23 Jan 2026, 08:42 AM)

Keshav Prasad Maurya: केशव प्रसाद मौर्य से अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया और कहा कि वह अच्छे से स्नान करें और इस विषय को यहीं खत्म करें.

Keshav Prasad Maurya and Avimukteshwaranand Saraswati

Keshav Prasad Maurya and Avimukteshwaranand Saraswati

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Keshav Prasad Maurya: स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को लेकर चल रहा विवाद अब खत्म होता नजर आ रहा है. एक तरफ जहां मेला प्रशासन ने अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस थमाया है तो वहीं दूसरी ओर उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने  उन्हें पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया है. डिप्टी सीएम का यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य सरकार और प्रशासन का रुख इस मामले में काफी सख्त नजर आ रहा है. बता दें कि प्रयागराज प्रशासन द्वारा स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके पद पर स्पष्टीकरण मांगे जाने और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के कालनेमि वाले बयान के बीच जब केशव प्रसाद मौर्य से अविमुक्तेश्वरानंद को लेकर सवाल किया गया तो उन्होंने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती को पूज्य शंकराचार्य जी कहकर संबोधित किया और कहा कि वह अच्छे से स्नान करें और इस विषय को यहीं खत्म करें. ऐसे में अब केशव प्रसाद मौर्य का स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के लिए नरम रवैया चर्चा में है.

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क्या है पूरा विवाद

प्रयागराज में चल रहे माघ मेले के दौरान मौनी अमावस्या के स्नान को लेकर ज्योतिष पीठ बद्रीनाथ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद और मेला प्रशासन आमने सामने आ गए थे. मेला प्रशासन ने उन्हें पालकी पर सवार होकर स्नान के लिए जाने से रोक दिया था. इसके बाद शंकराचार्य समर्थकों और पुलिस के बीच धक्का मुक्की हुई थी. इस घटना से नाराज होकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने धरना शुरू कर दिया था.इसके बाद से ही ये मामला लगातार तूल पकड़ता जा रहा है.


स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को मिला था नोटिस

इस बीच प्रयागराज प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को एक नोटिस भी थमाया था. प्रशासन का तर्क है कि चूंकि उनके शंकराचार्य पद से जुड़ा मामला अभी सुप्रीम कोर्ट में लंबित है ऐसे में वे खुद को आधिकारिक तौर पर शंकराचार्य कैसे लिख रहे हैं? इस नोटिस के बाद मेले में सुविधाओं को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया था. इस बीच सीएम योगी का भी बयान सामने आया था जिसमें उन्होंने कहा था कि 'एक संत के लिए, एक संन्यासी के लिए धर्म व राष्ट्र से बढ़कर कुछ नहीं होता.उसकी व्यक्तिगत प्रॉपर्टी कुछ नहीं होती, धर्म ही उसकी प्रॉपर्टी है. राष्ट्र ही उसका स्वाभिमान होता है. कोई धर्म के खिलाफ आचरण करता है,क्योंकि ऐसे बहुत कालनेमि होंगे जो धर्म की आड़ में सनातन धर्म को कमजोर करने की साजिश रच रहे होंगे, हमें उनसे सतर्क रहना होगा.' सीएम योगी के इस बयान को अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती पर हमला माना गया.