Opinion: यूपी 2027 से पहले सपा-कांग्रेस में दरार? इमरान मसूद का अखिलेश पर सीधा हमला- 'हम भीख नहीं मांग रहे, मुसलमानों पर आपकी खामोशी समझ से परे'

Opinion: यूपी में 2027 विधानसभा चुनाव से पहले सपा-कांग्रेस गठबंधन में तनाव के संकेत दिख रहे हैं. इमरान मसूद ने अखिलेश यादव के बयान पर सवाल उठाते हुए मुस्लिम मुद्दों और सीट बंटवारे को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी, जिससे राजनीतिक हलचल बढ़ गई है.

मस्जिद बैठक विवाद पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा का बचाव करते हुए BJP पर हमला बोला है. (File Photo: ITG)

मस्जिद बैठक विवाद पर कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने सपा का बचाव करते हुए BJP पर हमला बोला है. (File Photo: ITG)

यूपी तक

• 01:44 PM • 23 Jun 2026

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Opinion: उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनाव की तैयारियां तेज हो रही हैं. लेकिन कांग्रेस और समाजवादी पार्टी (सपा) के बीच गठबंधन को लेकर रस्साकशी साफ नजर आ रही है. कांग्रेस सांसद इमरान मसूद का ताजा बयान इस तनाव को और बढ़ा सकता है. दरअसल कुछ दिनों पहले अखिलेश यादव ने कहा था कि भविष्य के चुनावों में सहयोगियों के साथ सीट शेयरिंग की बातचीत 'सीटों की सौदेबाजी' पर नहीं, बल्कि 'जीतने के फॉर्मूले'पर आधारित होगी.

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अब इमरान मसूद ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कहा है, ‘मुझे नहीं समझ में आता, आप अपनी तैयारी करिए न, हम अपनी तैयारी कर रहे हैं. आप बहुत बड़े नेता हैं, आपके मुंह से ये बात अच्छी नहीं लगती. लेकिन उत्तर प्रदेश के अंदर मुसलमानों पर जुल्म हो रहा है, आपकी खामोशी मुसलमान की समझ में नहीं आ रही.  मंदिर के चंदे की चोरी के ऊपर आप मुखरता के साथ बोलते हो, लेकिन मुसलमान की सीना जोरी के ऊपर आप खामोश हो जाते हो, ये समझ में नहीं आ रहा है.’

मसूद ने अखिलेश के बयान पर सवाल उठाया और कहा कि जब सीटें ही तय नहीं होंगी तो जीत की बात कैसे की जा सकती है. उन्होंने जोर देकर कहा कि कांग्रेस सभी 403 विधानसभा सीटों पर तैयारी कर रही है और सपा से ‘भीख’ नहीं मांग रही. कांग्रेस बराबरी की भागीदारी चाहती है.

इमरान मसूद के पहले के तल्ख बयान

यह पहला मौका नहीं है जब इमरान मसूद ने सपा और अखिलेश यादव पर निशाना साधा हो. पहले भी उन्होंने सपा को कांग्रेस में विलय करने की सलाह दी थी और गठबंधन में बराबरी की मांग की थी. उन्होंने सपा पर मुसलमानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए पार्टी की रणनीति पर सवाल उठाए हैं. सहारनपुर में कांग्रेस का चेहरा माने जाने वाले मसूद की इन बयानबाजियों से गठबंधन की एकता पर सवाल खड़े हो रहे हैं.

अजय राय ने भी दिया था तल्ख बयान

मसूद इकलौते नहीं हैं जिनके बयान से सपा-कांग्रेस के रिश्तों की तल्खी दिख रही हो. हाल में यूपी कांग्रेस के अध्यक्ष राय भी कह चुके हैं कि पार्टी फिलहाल उत्तर प्रदेश की सभी 403 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है. बड़ा दिल दिखाने की बात करते हुए अजय राय ने कहा था कि 'प्यार एकतरफा नहीं होता... सबको बड़ा दिल दिखाने की जरूरत है.'

2024 में अच्छा प्रदर्शन लेकिन तनाव जारी

2024 लोकसभा चुनाव में सपा-कांग्रेस गठबंधन ने अच्छा प्रदर्शन किया था. लेकिन सीट बंटवारे को लेकर दोनों दलों में हमेशा तनाव रहा है. कांग्रेस अब 2027 में ज्यादा सीटों की मांग कर रही है, जबकि सपा अपनी प्रमुख भूमिका बनाए रखना चाहती है. अखिलेश यादव ने गठबंधन को बरकरार रखने की बात कही है. लेकिन जमीनी स्तर पर बयानबाजी से एकता प्रभावित होती दिख रही है.

यह रस्साकशी विपक्षी एकता के लिए चुनौती बनती जा रही है. दोनों पार्टियां अभी औपचारिक गठबंधन की बात कर रही हैं. लेकिन नेताओं के तीखे बयानों से भविष्य की रणनीति पर असर पड़ सकता है.

मौलाना ने भी उठाया मुस्लिम हितों का मामला

सपा-कांग्रेस संबंधों से इतर यूपी के एक बड़े मौलाना ने भी अखिलेश यादव को मुस्लिम हितों को लेकर घेरा है. उन्होंने अखिलेश यादव को चिट्ठी लिखकर मांग की कि 2027 UP चुनाव में सपा किसी मुस्लिम चेहरे को मुख्यमंत्री उम्मीदवार घोषित करे, वरना मुसलमान अन्य विकल्प देखेंगे. कुछ दिनों पहले भी रजवी ने कहा था कि अखिलेश यादव भरोसे लायक नहीं हैं, राहुल गांधी सावधान रहें.

रजवी के बयान में भी यह साफ दिख रहा है कि वह समाजवादी पार्टी को आड़े हाथों लेते हुए कांग्रेस की तरफ झुकाव की बातें कर रहे हैं. इमरान मसूद का भी तर्क मुस्लिम हितों से जुड़ा हुआ है. वहीं AIMIM भी आरोप लगा चुकी है कि सपा मुस्लिम हितों की अनदेखी कर रही है.

ऐसे में समाजवादी पार्टी के सामने यह दोहरी चुनौती है. एक तरफ कांग्रेस के साथ तनावपूर्ण दिखते संबंध हैं तो दूसरी तरफ अल्पसंख्यक समुदाय के साथ ‘नाइंसाफी’ के आरोप हैं. दस वर्ष से सत्ता से दूर अखिलेश यादव के लिए चुनाव पूर्व इन चुनौतियों से निपटना एक बड़ा चैलेंज होगा.

(लेखक इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ में अधिवक्ता हैं. राजनीतिक और सामाजिक विषयों पर लेखन करते हैं.)


(Disclaimer: यहां व्यक्त विचार लेखक की व्यक्तिगत राय हैं.)