No Clean Chit to anyone in SIT Report: अयोध्या के राम मंदिर में चढ़ाए गए चंदे और चढ़ावे की रकम में हुई कथित हेराफेरी के मामले में इस वक्त की सबसे बड़ी खबर सामने आ रही है. इस कथित घोटाले की तफ्तीश में जुटी विशेष जांच टीम (SIT) ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश सरकार को अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंप दी है. मंदिर ट्रस्ट के अनुरोध पर गठित इस तीन सदस्यीय हाई-लेवल कमेटी ने अपनी पहली रिपोर्ट में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं. सूत्रों के मुताबिक, रिपोर्ट में दान राशि की गणना और निगरानी व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठाए गए हैं. एसआईटी ने दान की गिनती की प्रक्रिया में संभावित खामियों और अनियमितताओं का उल्लेख किया है. सूत्रों के अनुसार, अभी तक जांच में किसी भी व्यक्ति को क्लीन चिट नहीं दी गई है. रिपोर्ट सौंपे जाने के बाद अब शासन स्तर पर आगे की कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा.
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रिपोर्ट में किसी को क्लीन चिट नहीं
सूत्रों के मुताबिक, एसआईटी ने अपनी इस प्रारंभिक रिपोर्ट में दान राशि की गणना (गिनती) और उसकी निगरानी व्यवस्था पर बेहद गंभीर सवाल उठाए हैं. जांच के दौरान यह पाया गया कि दान गिनने की प्रक्रिया में कई बड़ी खामियां और अनियमितताएं थीं.
एसआईटी ने मुख्य रूप से दो बिंदुओं पर कड़ा शिकंजा कसा है. जांच टीम ने नोट गिनने वाले कर्मियों के चयन की प्रक्रिया की पूरी पड़ताल की है. एसआईटी ने इन गणना कर्मियों और राम मंदिर ट्रस्ट के पदाधिकारियों के बीच के कनेक्शन और आपसी संबंधों की गहराई से जांच की है. इसके साथ ही मंदिर की आंतरिक व्यवस्था और इसके रोजमर्रा के संचालन के लिए जिम्मेदार कुछ रसूखदार पदाधिकारियों की भूमिका को भी जांच के दायरे में रखा गया है. रिपोर्ट में प्रशासनिक और निगरानी तंत्र की जवाबदेही तय करने की बात कही गई है.
SBI और प्राइवेट एजेंसी की लापरवाही
एसआईटी की प्रारंभिक जांच में यह साफ हो गया है कि इस कथित घोटाले की मुख्य वजह देश के सबसे बड़े सरकारी बैंक एसबीआई (SBI) और एक निजी एजेंसी की घोर लापरवाही थी. दरअसल, राम मंदिर के चढ़ावे का पूरा बैंकिंग कामकाज एसबीआई के पास था. नोटों को छांटने और गड्डियां बनाने की जिम्मेदारी भी उसी की थी. लेकिन बैंक ने इस अति-संवेदनशील काम का ठेका वाराणसी की एक निजी सिक्योरिटी एजेंसी को दे दिया. इस प्राइवेट एजेंसी ने बिना किसी कड़े बैकग्राउंड वेरिफिकेशन के ट्रस्ट के ही कुछ लोगों की सिफारिश पर अयोध्या के स्थानीय लड़कों को करोड़ों रुपये के कैश की गिनती में लगा दिया, जिससे इस हेराफेरी को अंजाम देना आसान हो गया.
एसआईटी ने मांगा अतिरिक्त समय और संसाधन
यह मामला बेहद संवेदनशील और व्यापक है इसलिए एसआईटी ने उत्तर प्रदेश सरकार से मामले की और ज्यादा विस्तृत तथा गहराई से जांच करने के लिए अतिरिक्त समय की मांग की है. इसके साथ ही तफ्तीश को तेजी से आगे बढ़ाने के लिए कुछ सहयोगी अधिकारियों और अतिरिक्त तकनीकी संसाधनों की भी मांग की गई है. माना जा रहा है कि शासन से हरी झंडी मिलने और डिटेल अंतिम रिपोर्ट आने के बाद इस मामले में कई और बड़े नामों का खुलासा हो सकता है.
शासन को सौंपी गई गोपनीय रिपोर्ट
लखनऊ के संभागीय आयुक्त विजय विश्वास पंत ने एसआईटी की ओर से यह प्रारंभिक रिपोर्ट एसीएस (गृह) संजय प्रसाद को सौंपी. रिपोर्ट प्राप्त होने के बाद अपर मुख्य सचिव (गृह) ने मीडिया से बातचीत से करते हुए कहा 'यह शासन द्वारा गठित तीन सदस्यीय एसआईटी कमेटी का एक प्रारंभिक प्रतिवेदन यानी इनिशियल रिपोर्ट है. यह एक बेहद गोपनीय जांच है. इसलिए इस समय हम ज्यादा जानकारी साझा नहीं कर सकते. हमारी टीम ने अब तक जो भी तथ्य जुटाए हैं उन्हें सरकार को उपलब्ध करा दिया गया है और आगे की विधिक कार्रवाई पर निर्णय शासन स्तर पर लिया जाएगा.'
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