Rinku Singh Emotional Photo: भारतीय क्रिकेट के स्टार बल्लेबाज रिंकू सिंह के पिता खानचंद्र सिंह अब इस दुनिया में नहीं रहे. आज सुबह ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में इलाज के दौरान उनका निधन हो गया. बता दें कि क रिंकू सिंह इन दिनों टी-20 वर्ल्ड कप में बिजी चल रहे थे. लेकिन पिता को लेकर आई इस खबर को सुनते ही वह तुरंत उनके पास पहुंच आए. फिलहाल रिंकू सिंह के पिता के पार्थिव शरीर को को अलीगढ़ लाया गया है. इस दौरान रिंकू सिंह की कुछ तस्वीरें भी सामने आई हैं जिसमें वह अपने पिता के पार्थिव शरीर के पास बैठे हुए नजर आ रहे हैं. तस्वीरों में रिंकू सिंह के चेहरे पर उदासी साफ देखी जा सकती है.
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आज सुबह अस्पताल में इलाज के दौरान हुआ निधन
बता दें कि रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह ग्रेटर नोएडा के यथार्थ अस्पताल में भर्ती थे. वह स्टेज फोर लिवर कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले तीन दिनों से उनकी स्थिति काफी सीरियस थी. उन्हें वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखा गया था. लेकिन डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद उन्हें बचाया नहीं जा सका. अपने पिता की बिगड़ती हालत की खबर पाकर रिंकू सिंह टी-20 वर्ल्ड कप मैच छोड़कर चेन्नई उनसे मिलने पहुंचे थे. हालांकि वो 26 फरवरी को जिम्बाब्वे से खेलने के लिए टीम से जुड़ गए थे.
बेटे को दूल्हा देखने का सपना रह गया अधूरा
खानचंद्र सिंह की सबसे बड़ी ख्वाहिश अपने बेटे रिंकू सिंह की शादी देखने की थी. रिंकू सिंह और मछली शहर की सांसद प्रिया सरोज की सगाई पिछले साल 8 जून को हो चुकी थी. दोनों की शादी पहले नवंबर 2025 में होनी थी. लेकिन क्रिकेट की व्यस्तता के कारण टल गई. फिर फरवरी की चर्चा हुई और आखिरकार जून में शादी तय की गई थी. खानचंद्र सिंह इस रिश्ते से बेहद खुश थे. लेकिन अपनी बहू को घर लाने का उनका सपना अधूरा ही रह गया.
गैस सिलेंडर ढोकर बेटे को बनाया स्टार
रिंकू सिंह की सफलता के पीछे उनके पिता का फौलादी इरादा था. वह अलीगढ़ की एक गैस एजेंसी में हॉकर का काम करते थे और साइकिल पर गैस सिलेंडर की सप्लाई करते थे. गरीबी और मुफलिसी के बावजूद उन्होंने रिंकू के क्रिकेट खेलने के जुनून को कभी मरने नहीं दिया.रिंकू सिंह के संघर्ष के हर अध्याय में उनके पिता ही 'रियल हीरो' रहे हैं. रिंकू सिंह की शोहरत और करोड़ों की कमाई के बाद भी खानचंद्र सिंह के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. उनके करीबियों के मुताबिक, इतना पैसा आने के बाद भी वह घमंड से कोसों दूर थे और सबसे मेल-मिलाप के साथ रहते थे. उनकी सादगी ही उनकी सबसे बड़ी पहचान थी.
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