पिता की आखिरी ख्वाहिश पूरी न होने की वजह से टूट गए रिंकू सिंह, पार्थिव शरीर वाली गाड़ी के ड्राइवर से कही ये बात

Rinku Singh's Father Death: क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का निधन. बेटे की शादी और प्रिया सरोज को बहू के रूप में देखने की अधूरी रह गई ख्वाहिश. गैस हॉकर से स्टार पिता बनने तक के संघर्ष की कहानी.

Rinkiu Singh with His Father

यूपी तक

27 Feb 2026 (अपडेटेड: 27 Feb 2026, 01:41 PM)

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Rinku Singh's Father Death: क्रिकेटर रिंकू सिंह के पिता खानचंद सिंह का लंबी बीमारी के बाद ग्रेटर नोएडा के यथार्थ हॉस्पिटल में निधन हो गया है. खानचंद स्टेज-4 लीवर कैंसर से जूझ रहे थे और पिछले कई दिनों से मैकेनिकल वेंटिलेटर सपोर्ट पर थे. पिता की हालत बिगड़ने की खबर मिलते ही रिंकू सिंह टी-20 वर्ल्ड कप मैच बीच में ही छोड़कर चेन्नई से वापस लौट आए थे. मगर होनी को कुछ और ही मंजूर था. 

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एक पिता की वो आखिरी ख्वाहिश

खानचंद सिंह के निधन के साथ ही उनकी एक सबसे बड़ी ख्वाहिश अधूरी रह गई. वह अपने लाड़ले बेटे रिंकू को दूल्हा बनते देखना चाहते थे. बताया जा रहा है कि रिंकू सिंह और मछली शहर की सांसद प्रिया सरोज की शादी इसी साल जून में होनी तय थी. पिछले साल 8 जून को लखनऊ के एक होटल में दोनों की सगाई हुई थी जिसमें खानचंद सिंह बेहद खुश नजर आ रहे थे और बच्चों पर आशीष लुटा रहे थे. 

शादी की तारीखें कई बार बदली गईं

पहले 18 नवंबर 2025 की तारीख तय हुई, लेकिन क्रिकेट व्यस्तताओं के कारण टल गई. फिर फरवरी 2026 में शादी की चर्चा हुई, जिसे आगे बढ़ा दिया गया. अब जून में शादी की तैयारियां चल रही थीं, लेकिन उस शुभ दिन से पहले ही यह दुखद खबर आ गई. 

मुफलिसी में ढोया बोझा पर बेटे को बनाया सितारा

रिंकू सिंह की कामयाबी के पीछे उनके पिता का फौलादी संघर्ष छिपा है. खानचंद सिंह अलीगढ़ की एक गैस एजेंसी में हॉकर का काम करते थे. उन्होंने सालों तक गैस के सिलेंडर अपने कंधे पर ढोए, कम सोए और कड़ी मेहनत की ताकि रिंकू के क्रिकेट खेलने का सपना पूरा हो सके. 

उनके करीबियों का कहना है कि रिंकू की शोहरत और बेशुमार पैसा आने के बाद भी खानचंद सिंह के व्यवहार में कोई बदलाव नहीं आया. उनमें रत्ती भर भी घमंड नहीं था और वह सबसे बड़े मिलनसार व्यक्ति थे. 

भावुक कर देने वाला वो पल

जब पिता के पार्थिव शरीर को ले जाने के लिए गाड़ी आई, तो रिंकू सिंह पूरी तरह टूट गए. लड़खड़ाती आवाज में उन्होंने मानव उपकार की गाड़ी के ड्राइवर को बुलाया. यह वही संस्था है जो शवों को ले जाने और सेवा का कार्य करती है. रिंकू सिंह ने खुद अपने पिता की अंतिम यात्रा के लिए इंतजाम किए.

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