Varanani News: फूलपुर थाना क्षेत्र से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने इंसानियत को शर्मसार कर दिया है. एक मामूली सड़क हादसे के बाद उपजी उन्मादी भीड़ ने व्यापारी मनीष कुमार सिंह की पीट-पीटकर जान ले ली. यह केवल एक हत्या नहीं, बल्कि एक हँसते-खेलते परिवार की खुशियों का कत्ल है.
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हादसे के बाद गुस्सा इतना हावी हुआ कि भीड़ ने कानून को अपने हाथ में ले लिया. मनीष को इस बेरहमी से पीटा गया कि वे मरणासन्न स्थिति में पहुंच गए. आनन-फानन में उन्हें BHU अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की तमाम कोशिशों के बावजूद वे जिंदगी की जंग हार गए. मनीष के जाने से पूरे इलाके में सन्नाटा है और लोगों में इस बर्बरता को लेकर गहरा आक्रोश है.
'जिंदगी भर सेवा करती, बस वो साथ रहते'
इस त्रासदी का सबसे कारुणिक पक्ष मनीष की पत्नी का विलाप है. न्याय की गुहार लगाते हुए उनके शब्द पत्थर दिल इंसान को भी रुला दें. सिसकियों के बीच वे कहती हैं, "अगर हादसे में उनके हाथ-पांव भी टूट जाते, तो मैं पूरी जिंदगी उनकी सेवा करती, उनके साथ रहती... लेकिन भीड़ ने उन्हें मुझसे छीन ही लिया." उनकी ये चीखें आज पूरे वाराणसी के आसमान में गूंज रही हैं, जो समाज की गिरती संवेदनाओं पर एक बड़ा सवालिया निशान लगाती हैं.
पुलिसिया कार्रवाई और न्याय की उम्मीद
परिजनों का स्पष्ट आरोप है कि यह महज भीड़ का गुस्सा नहीं, बल्कि जानबूझकर किया गया हमला था. मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने आठ नामजद आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया है. लेकिन सवाल वही है— क्या कागजी कार्रवाई मनीष की पत्नी के आंसुओं को पोंछ पाएगी? क्या वाराणसी की पुलिस उन दोषियों को ऐसी सजा दिला पाएगी जो समाज के लिए एक नजीर बने?
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