'100 करोड़ का वर्ल्ड क्लास' बनारस रेलवे स्टेशन मॉनसून की पहली बारिश नहीं झेल सका, पंखों से बहता दिखा पानी!

रोशन जायसवाल

• 02:06 PM • 07 Jul 2026

Varanasi Station Viral Video: वाराणसी के 100 करोड़ रुपये की लागत से बने बनारस रेलवे स्टेशन पर पहली बारिश में छत और पंखों से पानी टपकने का वीडियो वायरल हो गया. रेलवे ने सफाई दी. लेकिन निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं.

Varanasi Station Viral Video

Varanasi Station Viral Video

Google CTA

Varanasi Station Viral Video: वाराणसी के जिस स्टेशन को 100 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से संवारा गया और जिसे वर्ल्ड क्लास दर्जे का तमगा मिला और खुद देश के प्रधानमंत्री और स्थानीय सांसद नरेंद्र मोदी ने जिसका लोकार्पण किया था... वह बनारस रेलवे स्टेशन मॉनसून की पहली ही बारिश का दबाव नहीं झेल सका. वाराणसी के बनारस रेलवे स्टेशन (पूर्व में मडुआडीह) का एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है जिसमें स्टेशन के प्लेटफॉर्म की फॉल्स सीलिंग से पानी इस तरह बह रहा है मानो कोई सरकारी नल खुला छोड़ दिया गया हो.  हैरान करने वाली बात यह है कि प्लेटफॉर्म पर लगे पंखों, जिनसे ठंडी हवा आनी चाहिए थी उनसे पानी का झरना बहता दिखाई दे रहा है. इस घटना ने एक बार फिर सरकारी निर्माण कार्यों की गुणवत्ता और मेंटेनेंस पर बड़े सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं.

यह भी पढ़ें...

प्लेटफ़ॉर्म नंबर 8 पर मची अफरातफरी

सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा वीडियो बनारस रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 का है. 6 जुलाई 2026 को हुई भारी बारिश के दौरान पूरा प्लेटफॉर्म जलमग्न हो गया. छत से लगातार हो रहे जलजमाव और रिसाव के कारण यात्रियों के बीच अफरातफरी मच गई. सोशल मीडिया पर वीडियो पोस्ट करने वाले एक रेल यात्री ने प्लेटफॉर्म की बदहाली दिखाते हुए कहा कि बारिश का पानी इस कदर टपक रहा है कि प्लेटफॉर्म पर कहीं भी बैठने या खड़े होने की जगह नहीं बची है. यात्री ने वीडियो में तंज कसते हुए यह भी कहा कि चूंकि खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 15 जुलाई 2021 को इस भव्य स्टेशन का उद्घाटन किया था. इसलिए रेल प्रशासन को इसे तुरंत दुरुस्त करना चाहिए ताकि वर्ल्ड क्लास स्टेशन की हो रही इस अंतरराष्ट्रीय बेइज्जती को रोका जा सके.

वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने और चौतरफा किरकिरी होने के बाद वाराणसी रेल मंडल बैकफुट पर आ गया और आनन-फानन में विभाग की तरफ से एक आधिकारिक सफाई जारी की गई. वाराणसी रेल मंडल की ओर से जारी बयान में बताया गया कि 'प्लेटफॉर्म के पीपी शेल्टर के ऊपर बने वैली गटर की समय-समय पर सफाई की जाती है. बनारस स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर 8 पर पीपी शेल्टर के ऊपर डाउन पाइप और वैली गटर के जोड़ पर भारी मात्रा में सूखे पत्तों का कचरा और पतंग की डोर जमा हो गई थी. संभवतः तेज हवा चलने के कारण ये चीजें शेल्टर में आ गिरीं जिससे अस्थायी रूप से जल निकासी का रास्ता ब्लॉक हो गया. इसी वजह से 6 जुलाई को हुई भारी बारिश के दौरान पानी का रिसाव होने लगा. मामला संज्ञान में आते ही कर्मचारियों को भेजकर सफाई करा दी गई है और समस्या का समाधान कर दिया गया है.'

क्या 100 करोड़ के प्रोजेक्ट में बैकअप प्लान नहीं था?

भले ही रेलवे ने कचरा फंसने की दलील देकर अपना पल्ला झाड़ लिया हो. लेकिन स्थानीय लोगों और यात्रियों का गुस्सा शांत नहीं हो रहा है. सोशल मीडिया पर लोग सवाल उठा रहे हैं कि क्या 100 करोड़ रुपये की लागत से बने आधुनिक स्टेशन का ड्रेनेज सिस्टम इतना कमजोर है कि थोड़े से पत्ते और पतंग के धागे से सीधे फॉल्स सीलिंग और बिजली के पंखों से पानी बहने लगे? बहरहाल रेलवे का दावा है कि स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है. लेकिन मॉनसून की इस पहली ही परीक्षा ने वर्ल्ड क्लास दावों की पोल जरूर खोल दी है.