UP Home Guards: उत्तर प्रदेश की योगी सरकार ने प्रदेश के लाखों होमगार्ड्स को मानसून सीजन में एक बड़ा और शानदार तोहफा दिया है. सोमवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में एक बेहद संवेदनशील प्रस्ताव को हरी झंडी दे दी गई. अब यूपी होमगार्ड विभाग में सेवा दे रहे होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रितों को हर साल प्रति परिवार 5 लाख रुपये तक का मुफ्त और कैशलेस इलाज मिलेगा.
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सरकार के इस बड़े फैसले से राज्य के करीब 69,000 होमगार्ड परिवारों को सीधा फायदा पहुंचने की उम्मीद है. यह पूरी स्वास्थ्य सुविधा साचिस (SACHIS) यानी स्टेट एजेंसी फॉर कॉम्प्रिहेंसिव हेल्थ एंड इंटीग्रेटेड सर्विसेज के जरिए मुहैया कराई जाएगी.
इस कैबिनेट बैठक में सिर्फ इलाज ही नहीं, बल्कि कर्मचारियों की जेब को सीधे फायदा पहुंचाने वाला एक और बड़ा ऐलान हुआ है. आखिर क्या है वो दूसरा फैसला जिसने यूपी पुलिस और कई अन्य विभागों के कर्मचारियों के चेहरे पर भी मुस्कान ला दी है?
गंभीर बीमारी में मिलेगी बड़ी राहत
कैबिनेट के फैसलों की जानकारी देते हुए प्रदेश के वित्त मंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने इस योजना की अहमियत को रेखांकित किया. वित्त मंत्री ने कहा,
"इस योजना के तहत होमगार्ड स्वयंसेवकों, अवैतनिक अधिकारियों और उनके आश्रित परिवार के सदस्यों को आयुष्मान भारत-प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के तहत लिस्टेड सभी सरकारी और निजी अस्पतालों में हर साल 5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. गंभीर बीमारी की स्थिति में यह योजना परिवारों को बहुत बड़ी वित्तीय राहत देगी."
इस मानवीय योजना को अमलीजामा पहनाने के लिए राज्य सरकार हर होमगार्ड के लिए 3,000 रुपये का सालाना प्रीमियम खुद भरेगी. इससे सरकारी खजाने पर करीब 35.50 करोड़ रुपये का अतिरिक्त बोझ आएगा.
पुलिस समेत कई विभागों का बढ़ा वर्दी भत्ता
कैबिनेट ने वेतन समिति (2016) की सिफारिशों को मानते हुए गृह (पुलिस) विभाग के कर्मचारियों के भत्तों में संशोधन को मंजूरी दे दी है. इसके अलावा न्याय विभाग के अधीनस्थ न्यायालयों, जेल प्रशासन, वन विभाग, आबकारी, चिकित्सा स्वास्थ्य, चिकित्सा शिक्षा और आयुष विभाग के कर्मचारियों के लिए भी खुशखबरी है.
इन सभी विभागों के कर्मचारियों के लिए वर्दी भत्ता, वर्दी नवीनीकरण भत्ता और धुलाई भत्ते में शानदार बढ़ोतरी की गई है. इस फैसले से कर्मचारियों को महंगाई के इस दौर में अपनी वर्दी के रख-रखाव के लिए बढ़ी हुई रकम मिलेगी, जिससे सरकार पर सालाना करीब 20 करोड़ रुपये का वित्तीय भार बढ़ेगा.
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