Sitapur News: सीतापुर में बोरों की कमी से ठप गेहूं खरीद, MSP से ₹300 कम दाम पर बेचने को मजबूर किसान; आंदोलन की चेतावनी

सीतापुर के किसानों को सरकारी क्रय केंद्रों पर बोरे की कमी के कारण गेहूं की खरीद में देरी का सामना करना पड़ रहा है. किसान प्रशासन से तुरंत खरीद शुरू करने की मांग कर रहे हैं और 5 अप्रैल तक कार्रवाई नहीं होने पर आंदोलन की चेतावनी दी है.

Newzo

• 05:01 PM • 02 Apr 2026

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सीतापुर: संयुक्त किसान मोर्चा के संयोजक पिंदर सिंह सिद्धू ने जिलाधिकारी सीतापुर को ज्ञापन सौंपते हुए अवगत कराया कि जनपद में गेहूं खरीद के लिए अधिकांश क्रय केंद्र खोले जा चुके हैं, लेकिन बोरों की उपलब्धता न होने के कारण अभी तक किसी भी केंद्र पर प्रभावी रूप से खरीद कार्य प्रारंभ नहीं हो सका है. इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.

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जनपद सीतापुर में वर्ष 2026-27 की गेहूं खरीद 30 मार्च से प्रारंभ घोषित की गई थी. क्रय केंद्रों पर बैनर एवं अन्य व्यवस्थाएं तो कर दी गई हैं तथा केंद्र प्रभारी भी उपस्थित हैं, किन्तु किसानों को बताया जा रहा है कि बोरों की कमी के चलते खरीद लगभग 15 अप्रैल के बाद ही संभव हो सकेगी.

न्यूनतम समर्थन मूल्य से कम दाम, किसानों में बढ़ा असंतोष

इस स्थिति से किसानों में भारी असंतोष व्याप्त है. वर्तमान में खुले बाजार एवं मंडियों में गेहूं का मूल्य लगभग ₹2230-2250 प्रति कुंतल चल रहा है, जो न्यूनतम समर्थन मूल्य से लगभग ₹300 कम है. ऐसे में किसान मजबूरीवश अपनी उपज कम दामों पर बेचने को विवश हैं, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है. अनुमानतः 50 कुंतल गेहूं रखने वाले किसान को लगभग ₹15,000 तक की हानि हो सकती है.

जिलाधिकारी ने शीघ्र गेहूं खरीद की बात कही

जिलाधिकारी द्वारा समस्या की गंभीरता को देखते हुए आश्वासन दिया गया है कि 2-3 दिनों के भीतर खरीद कार्य प्रारंभ कराने के प्रयास किए जाएंगे. वहीं किसान मजदूर संघर्ष मोर्चा के जिला सचिव ने कहा कि संगठन ने जिला प्रशासन से मांग की है कि इस गंभीर समस्या का तत्काल संज्ञान लेते हुए सभी सरकारी क्रय केंद्रों पर शीघ्र बोरों की उपलब्धता सुनिश्चित कराई जाए, ताकि गेहूं की खरीद समय से शुरू हो सके और किसानों को न्यूनतम समर्थन मूल्य का लाभ मिल सके.

किसानों ने चेतावनी दी है कि यदि 5 अप्रैल तक उचित कार्रवाई नहीं की गई, तो वे मजबूरन अपनी उपज औने-पौने दामों पर बेचने को विवश हुए तो संगठन आंदोलन करने के लिए बाध्य होगा.