Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर में पुराने और नए शहर को जोड़ने वाले करीब 100 साल पुराने ऐतिहासिक 'नवाबी पुल' को तोड़ने का कार्य शुरू कर दिया गया है. अंग्रेजों के शासनकाल में निर्मित यह पुल लंबे समय से जर्जर स्थिति में था और सुरक्षा कारणों से इसे हटाने का निर्णय लिया गया.
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यह पुल पुराने शहर और नए शहर के बीच मुख्य संपर्क मार्ग था, जिससे प्रतिदिन लगभग 80 हजार लोग आवागमन करते थे. व्यापार, रेलवे स्टेशन, कार्यालयों और दैनिक जरूरतों के लिए यह मार्ग शहर की जीवनरेखा माना जाता था.
प्रशासन ने यातायात प्रभावित न हो, इसके लिए पुल के समानांतर पहले ही एक नया वैकल्पिक पुल तैयार कर दिया है. पुराने पुल को बंद किए जाने के बाद अब सभी वाहनों और राहगीरों का आवागमन नए पुल से कराया जा रहा है.
नई परियोजना के तहत पुराने पुल की जगह 7.11 करोड़ रुपये की लागत से नया पुल बनाया जाएगा. प्रस्तावित पुल की चौड़ाई 7 मीटर और लंबाई 28 मीटर होगी, जबकि पुराने पुल की चौड़ाई लगभग 5.5 मीटर थी. नए पुल के बनने से ट्रैफिक जाम की समस्या में कमी आने और हजारों लोगों को बेहतर सुविधा मिलने की उम्मीद है.
स्थानीय बुजुर्गों और निवासियों में हालांकि इस ऐतिहासिक पुल के टूटने को लेकर भावनात्मक जुड़ाव के कारण मायूसी भी है, क्योंकि यह पुल कई पीढ़ियों की यादों का हिस्सा रहा है.
पुल अत्यधिक जर्जर हो चुका था
लोक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता ज्योतेंद्र सिंह के अनुसार, पुल अत्यधिक जर्जर हो चुका था और लगातार बढ़ते यातायात के कारण किसी दुर्घटना की आशंका बनी हुई थी. इसी वजह से पुराने पुल को पूरी तरह हटाकर नया पुल बनाने का निर्णय लिया गया.
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