सीतापुर बिसवां से पैन-ड्यू-डीएसआर कैप्सूल का लिया गया था नमूना, जांच में निकली गड़बड़ी, हिमाचल तक जुड़े कनेक्शन

Sitapur News:  सीतापुर के बिसवां में पैन-ड्यू-डीएसआर गैस कैप्सूल का नमूना जांच में नकली पाया गया है. आगरा प्रयोगशाला की रिपोर्ट के अनुसार, हिमाचल प्रदेश की कंपनी द्वारा निर्मित इस दवा में पैंटोप्राजोल और डोम्पेरिडोन जैसे जरूरी तत्व गायब थे. विभाग अब मेडिकल स्टोर और निर्माता कंपनी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहा है.

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Newzo

• 01:16 PM • 07 May 2026

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Sitapur News: उत्तर प्रदेश के सीतापुर मे खाद्य पदार्थों की तरह ही अब दवाओं में भी मिलावट होने लगी है. गैस की दवा (पैन-ड्यू-डीएसआर) जांच में नकली पाई गई है. हिमाचल प्रदेश की कंपनी की बनाई गई इस दवा में एक भी तत्व नहीं मिला, जो कि गैस की दवा में जरूरी होते हैं. औषधि निरीक्षक ने प्रकरण की विवेचना शुरू कर दी है. विक्रेता को नोटिस जारी की गई है. इसी क्रम में कंपनी की भी जांच की जाएगी.

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औषधि निरीक्षक अनीता कुरील ने 23 दिसंबर 2025 को बिसवां के सागर मेडिकल स्टोर से पैन-ड्यू-डीएसआर का नमूना भरा था, जिसे जांच के लिए आगरा प्रयोगशाला भेजा गया था। जांच रिपोर्ट आई तो औषधि निरीक्षक भी सकते में आ गईं। गैस की समस्या से निजात दिलाने वाली इस दवा में वह तत्व ही नहीं मिले, जो कि जरूरी होते हैं.  इसमें पैंटोप्राजोल न ही डोम्पेरिडोन मिला। दवा डुअल हेल्थ केयर सिरमौर हिमाचल प्रदेश की कंपनी की है. दवा निरीक्षक ने मेडिकल स्टोर संचालक मो. अजमल को नोटिस जारी कर विवेचना की जा रही है.

सस्ते केमिकल से बनतीं नकली दवाएं

जिला चिकित्सालय के चिकित्सक डॉक्टर अनुपम मिश्र ने बताया कि नकली दवा के सेवन से शरीर के अलग-अलग अंगों को नुकसान पहुंचता है. लिवर और किडनी भी खराब हो सकते हैं. उन्होंने बताया कि बिना जांच के नकली और असली दवा फर्क कर पाना भी मुश्किल होता है. उन्होंने कहा कि सिर्फ लाइसेंस वाले मेडिकल स्टोर से ही दवा खरीदें. सस्ती ऑफर वाली दवाओं से बचें और चिकित्सक के परामर्श के बिना दवा न लें.

मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया जाएगा

औषधि निरीक्षक अनीता कुरील ने कहा कि बिसवां के सागर मेडिकल स्टोर से पैन-ड्यू-डीएसआर का नमूना लिया गया था. जांच में दवा नकली होने की पुष्टि हुई है. मेडिकल स्टोर संचालक को नोटिस जारी करने के साथ ही विवेचना की जा रही है. इसके बाद मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत में वाद दायर किया जाएगा. इसकी जानकारी होने के बाद अगली कड़ी का पता लगाया जाएगा. इसी क्रम में निर्माता कंपनी पर जांच का शिकंजा कसेगा.