Saharanpur Politics: ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के राष्ट्रीय अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी शनिवार को सहारनपुर पहुंच रहे हैं, जहां वह शाम करीब 6 बजे एक जनसभा को संबोधित करेंगे. पार्टी के अनुसार, यह सभा उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 के मद्देनजर चुनावी अभियान की शुरुआत मानी जा रही है. कार्यक्रम स्थल पर तैयारियां लगभग पूरी कर ली गई हैं और कार्यकर्ता व पदाधिकारी व्यवस्थाओं में जुटे हुए हैं.
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इस बीच AIMIM के उत्तर प्रदेश अध्यक्ष शौकत अली ने मीडिया से बातचीत में कहा कि पार्टी 2027 का विधानसभा चुनाव पूरी मजबूती के साथ लड़ने की तैयारी कर रही है. शौकत अली ने कहा कि उत्तर प्रदेश में 2027 का चुनाव मजलिस इत्तेहादुल मुस्लिमीन पूरी मजबूती के साथ लड़ेगी. इस मर्तबा हमारी तैयारी 200 सीटों पर है. अंतिम फैसला पार्टी के नेशनल प्रेसिडेंट जनाब बैरिस्टर असदुद्दीन ओवैसी साहब करेंगे कि हम कितनी सीटों पर चुनाव लड़ेंगे.
उन्होंने आगे कहा कि हम ये चाहते हैं कि उत्तर प्रदेश में बीजेपी को रोका जाए. उसके लिए तमाम विपक्षी पार्टियों को एकजुट होना पड़ेगा. लोगों को अपने दिल को बड़ा करना पड़ेगा और अहंकार से बाहर आना पड़ेगा. वरना जिस तरीके से बिहार के अंदर इंडिया ब्लॉक का जहाज डूब गया, ऐसा न हो कि उत्तर प्रदेश के अंदर भी उनका जहाज डूब जाए.
पेपर लीक रोक नहीं पा रहे, यूनिवर्सिटी पर कर रहे कार्रवाई
जौहर यूनिवर्सिटी पर कार्रवाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि वो तालीमी दरगाह है, वो तालीम का गहवारा है. उस यूनिवर्सिटी में सिर्फ मुसलमान बच्चे नहीं, हर समाज के बच्चे पढ़ते हैं. अब आप इसी से अंदाजा लगा लीजिए कि सरकार की मानसिकता क्या है. ये तालीमी इदारों पर बात ही नहीं करती, ये तो सिर्फ मंदिर और शराब की दुकानों पर बात करती है. जौहर यूनिवर्सिटी को तोड़ने की बात, छोटे-छोटे प्राइमरी स्कूलों को बंद करने की बात. ये सरकार बनाती क्या है? अगर देश का नौजवान शिक्षित नहीं होगा तो देश आगे नहीं बढ़ेगा. ये लोग नहीं चाहते. इसलिए हर छह महीने में एक पेपर लीक होता है.
जंतर-मंतर के धरने का जिक्र कर सरकार पर साधा निशाना
दिल्ली के जंतर-मंतर पर इतना बड़ा धरना चल रहा है. एक तरफ पेपर लीक करते हो और दूसरी तरफ यूनिवर्सिटी को तोड़ रहे हो. इसका मतलब क्या है? आपको शिक्षा से दुश्मनी क्यों है? आप नहीं पढ़े तो हम क्या करें. आप मठ में चले गए तो हम क्या करें. लेकिन जो बच्चे डॉक्टर और इंजीनियर बनना चाहते हैं, अगर वो साधु या सन्यासी नहीं बनना चाहते तो इसका मतलब ये नहीं कि आप यूनिवर्सिटी को तोड़ देंगे. ये गलत है.
उन्होंने विपक्ष पर भी निशाना साधते हुए कहा, मुझे अफसोस इस बात का है कि विपक्ष, जिसके पास विधायक और सांसद हैं और जो मुसलमानों के वोट से जीतकर आए हैं, जो आजम खान के नाम पर जीतकर आए हैं, वो कहां हैं? उन्हें जाकर जौहर यूनिवर्सिटी के गेट पर बैठ जाना चाहिए, कैंप कर जाना चाहिए. फिर देखता हूं कौन सा बुलडोजर आता है. हमारी पार्टी पूरे प्रदेश में डीएम के माध्यम से राष्ट्रपति और राज्यपाल महोदय को ज्ञापन दे रही है. हमारी जितनी ताकत है, हम पूरी कोशिश कर रहे हैं कि उस यूनिवर्सिटी को बचाया जाए.
मस्जिद और वक्फ को लेकर बड़ा बयान
वक्फ और मस्जिदों से जुड़े मुद्दों पर उन्होंने कहा, जानकारी मिली है कि पूरे उत्तर प्रदेश ही नहीं बल्कि पूरे हिंदुस्तान में इस किस्म की कार्रवाई सरकार कर रही है. सरकार मुसलमानों की दुश्मन है, साथ-साथ इस्लाम की दुश्मन है. सरकार वक्फ बोर्ड को इसलिए खत्म कर रही है ताकि 100-200 साल पुरानी इमारतों को तोड़कर बहुसंख्यक समाज को दिखा सके कि हम मुस्लिम विरोधी हैं और उसका वोट बैंक बढ़े. सवाल ये है कि मस्जिद पहले तामीर हुई थी या कलेक्ट्रेट पहले बना था? पहले मस्जिद बनी होगी, बाद में कलेक्ट्रेट बना होगा. बल्कि उस कलेक्ट्रेट की जमीन भी मस्जिद पक्ष ने दी थी, पता कर लीजिएगा. वही हाल है कि बैठूं तेरी गोद में और उखाड़ूं तेरी दाढ़ी,सरकार यही कर रही है.
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