Jauhar University: समाजवादी पार्टी के कद्दावर नेता आजम खान की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं. उत्तर प्रदेश के रामपुर में स्थित मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी को लेकर एक और बड़ी खबर आई है. लोक निर्माण विभाग (PWD) ने यूनिवर्सिटी कैंपस के बीच से गुजरने वाली चमचमाती फोर-लेन सड़क को 'आम रास्ता' घोषित कर दिया है.
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विभाग ने यूनिवर्सिटी के मुख्य गेट पर बाकायदा साइनबोर्ड भी टांग दिया है, जिस पर साफ लिखा है कि यह सड़क अब आम जनता के इस्तेमाल के लिए पूरी तरह खुल चुकी है.
₹17 करोड़ की सरकारी सड़क
दरअसल, यह पूरा मामला साल 2016-17 का है, जब प्रदेश में अखिलेश यादव की अगुवाई वाली समाजवादी पार्टी की सरकार थी. उस वक्त PWD ने करीब 17.16 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से यूनिवर्सिटी कैंपस के भीतर से गुजरने वाली 3 किलोमीटर लंबी फोर-लेन सीमेंटेड सड़क का निर्माण कराया था. यह सड़क सीधे लालपुर बांध को जोड़ती है.
सब कुछ ठीक चल रहा था, लेकिन साल 2019 में यूनिवर्सिटी प्रशासन ने अचानक मुख्य गेट बंद कर दिया. आलम यह था कि इस सरकारी सड़क पर आम जनता तो दूर, खुद PWD के अधिकारियों की एंट्री भी बैन कर दी गई.
यह सरकारी पैसा है और सड़क भी सरकारी है. यह लालपुर बांध तक जाती है और इसे जनता की सुविधा के लिए बनाया गया था. इसलिए हमने गेट के बाहर बोर्ड लगा दिया है और अंदर भी दो-तीन बोर्ड लगाएंगे, ताकि लोग बिना किसी डर के इसका इस्तेमाल कर सकें.
कोर्ट की चौखट और PWD का एक्शन
मामला तूल पकड़ते ही कोर्ट तक जा पहुंचा. PWD के अधिशासी अभियंता किशन वीर सिंह ने बताया कि यूनिवर्सिटी द्वारा रास्ता बंद किए जाने के बाद विभाग ने कई नोटिस जारी किए. मामला पहले इलाहाबाद हाई कोर्ट गया, फिर निचली अदालत में PWD के पक्ष में फैसला आया. इसके बाद यूनिवर्सिटी प्रशासन हाई कोर्ट से स्टे ले आया. पिछले कुछ सालों में इस पर दर्जनों सुनवाइयां हुईं, लेकिन कोई अंतिम फैसला नहीं हो सका.
फिलहाल, हाई कोर्ट ने यूनिवर्सिटी को सड़क को हुए नुकसान की भरपाई के तौर पर 30 फीसदी रकम जमा करने का आदेश दिया है, जबकि गेट हटाने का मुख्य मुद्दा अभी भी अदालत में लंबित है.
इस बीच, PWD ने साफ कर दिया है कि जनता के पैसे से बनी सड़क पर किसी का एकाधिकार नहीं चलेगा. अब देखना यह होगा कि आजम खान की जौहर यूनिवर्सिटी इस 'आम रास्ते' पर आगे क्या कानूनी रुख अपनाती है.
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