आजम खान की रिहाई के इंतजार में जुटे थे समर्थक, अचानक पहुंची ED और साथ ले गई, फिर रामपुर के लोगों ने कैमरे पर कह दी बड़ी बात!

आमिर खान

• 12:35 PM • 02 Nov 2026

रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे समर्थकों की खुशियां उस वक्त मायूसी में बदल गईं, जब जेल से बाहर आने से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम उन्हें अपने साथ ले गई.

Rampur People Reaction On Azam Khan

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Rampur People Reaction On Azam Khan: रामपुर में समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खान की जेल से रिहाई की उम्मीद लगाए बैठे समर्थकों की खुशियां उस वक्त मायूसी में बदल गईं, जब जेल से बाहर आने से पहले ही प्रवर्तन निदेशालय (ED) की टीम उन्हें अपने साथ ले गई. यूपी तक के शो 'यूपी की राय' में रामपुर के लोगों ने इस पूरे घटनाक्रम पर अपनी प्रतिक्रिया दी. किसी ने इसे कानून का उल्लंघन बताया तो किसी ने आजम खान के साथ हुई कार्रवाई को राजनीतिक बदले की भावना से प्रेरित बताया. हालांकि ये सभी आरोप और राय स्थानीय लोगों की ओर से व्यक्त किए गए हैं.

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वकील ने बताया जेल के अंदर क्या हुआ?

आजम खान के वकील काशिफ खान ने बताया कि वह अपने साथी वकीलों के साथ जेल की लॉबी में मौजूद थे. उनके मुताबिक जेल से बाहर आने के बाद ईडी के अधिकारी अंदर पहुंचे और आजम खान से अपने साथ चलने को कहा. वकीलों ने अधिकारियों से गिरफ्तारी का वारंट, मुकदमे की संख्या और उन्हें ले जाने की वजह पूछी, लेकिन काशिफ खान का दावा है कि उन्हें उस समय कोई स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई.

काशिफ खान ने कहा कि वकीलों ने यह भी जानना चाहा कि आजम खान को कहां ले जाया जाएगा. उनके मुताबिक ईडी के एक अधिकारी ने कहा कि उन्हें भी अभी इसकी जानकारी नहीं है और रास्ते में पता चलेगा. काशिफ का आरोप है कि अधिकारियों ने जेल की लॉबी में आजम खान को गिरफ्तारी की वजह नहीं बताई. उन्होंने यह भी बताया कि आजम खान ने खुद अधिकारियों से पूछा था कि उन्हें किस कारण ले जाया जा रहा है, लेकिन उन्हें भी तत्काल कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला.

कोर्ट में पेशी के बाद डासना जेल भेजे गए आजम खान

काशिफ खान के मुताबिक जब आजम खान ने गाड़ी में बैठने से इनकार किया तो ईडी के अधिकारियों ने उन्हें कुछ कागजात दिए, जिन पर उनसे हस्ताक्षर कराए गए. इसके बाद टीम उन्हें लेकर रवाना हो गई. काशिफ ने बताया कि रास्ते में उन्हें जानकारी मिली कि आजम खान को पहले गाजियाबाद ले जाया गया. वहां से उन्हें दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल ले जाकर मेडिकल कराया गया और फिर रात में ईडी कार्यालय में रखा गया.

वकील के अनुसार अगले दिन सुबह करीब 10:30 बजे आजम खान को गाजियाबाद की अदालत में पेश किया गया, जहां से उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया. इसके बाद उन्हें डासना जेल भेज दिया गया. काशिफ खान ने कहा कि उनकी कानूनी टीम अब एफआईआर और अन्य दस्तावेज जुटाएगी. इसके बाद अदालत में कानूनी प्रक्रिया के तहत अपना पक्ष रखेगी.

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रामपुर के लोगों ने क्या कहा?

रामपुर के रहने वाले धर्म कुमार वाल्मीकि ने आजम खान को ईडी की ओर से ले जाए जाने की घटना की कड़े शब्दों में निंदा की. उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से लोगों की खुशियां मातम में बदल गईं. धर्म कुमार ने आजम खान के खिलाफ कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए कहा कि उन्होंने रामपुर में शिक्षा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण काम किए हैं और मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी की स्थापना की है.

वहीं, शादाब नाम के युवक ने कहा कि आजम खान के जेल से बाहर आने की खबर से रामपुर में ईद जैसा माहौल था. लोगों को उम्मीद थी कि वह जेल से निकलकर अपने घर जाएंगे, जो जेल से करीब 100 मीटर की दूरी पर है. लेकिन उन्हें घर जाने और परिवार से मिलने का मौका दिए बिना ही ईडी की टीम अपने साथ ले गई. शादाब ने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई से लोगों की खुशियां फीकी पड़ गईं.

जौहर यूनिवर्सिटी का भी उठाया मुद्दा

रामपुर के रहने वाले शादाब ने आजम खान के कामों का जिक्र करते हुए कहा कि मोहम्मद अली जौहर यूनिवर्सिटी ने शहर को नई पहचान दी है. उन्होंने दावा किया कि वहां कम खर्च में शिक्षा हासिल करने का अवसर मिला. शादाब ने जौहर यूनिवर्सिटी से जुड़े मेडिकल कॉलेज का भी मुद्दा उठाया. उनका कहना था कि मेडिकल कॉलेज बंद होने से रामपुर के लोगों को इलाज के लिए मुरादाबाद, बरेली और दिल्ली जाना पड़ता है.

लॉ पढ़ने वाले स्टूडेंट लुकमान जमीर ने भी जेल के बाहर मौजूद रहने की बात कही. उन्होंने बताया कि शाम करीब पांच बजे वह जेल पहुंच गए थे. उनके मुताबिक आजम खान की झलक दिखने के बाद समर्थकों में खुशी का माहौल था, लेकिन ईडी की गाड़ियां पहुंचने के बाद स्थिति बदल गई. लुकमान ने कहा कि आजम खान को उनकी पत्नी और बड़े बेटे से मिलने का मौका भी नहीं मिला.

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'80 साल के व्यक्ति के साथ ऐसा व्यवहार नहीं होना चाहिए'

बीकॉम की पढ़ाई पूरी कर चुके अहमद ने कहा कि आजम खान को जिस तरह से ले जाया गया, उससे उन्हें दुख पहुंचा. उन्होंने कहा कि आजम खान ने यूनिवर्सिटी और स्कूल बनवाए हैं और रामपुर के लोगों के लिए काम किया है. अहमद ने सरकार से अपील की कि किसी भी व्यक्ति के साथ कार्रवाई करते समय इंसानियत का ध्यान रखा जाना चाहिए.

वहीं, अरबाज हुसैन ने भी आजम खान के खिलाफ कार्रवाई पर नाराजगी जताई. उन्होंने कहा कि आजम खान 10 बार विधायक, दो बार सांसद और चार बार मंत्री रह चुके हैं. उन्होंने सरकार से उनके साथ अन्याय न करने की अपील की. इन सभी लोगों ने ईडी की कार्रवाई पर सवाल उठाए और आजम खान के साथ खड़े रहने की बात कही.

जाते-जाते आजम खान ने वकीलों से क्या कहा?

इस पूरे घटनाक्रम के बीच काशिफ खान ने आजम खान की ओर से जेल से ले जाए जाते समय कही गई बात भी बताई. उनके मुताबिक आजम खान ने अपने वकीलों और साथियों से कहा, 'परेशान न हो कोई. मैं जिंदा आया तो गाजी कहलाऊंगा और अगर मर गया तो शहीद कहलाऊंगा.'

काशिफ के अनुसार आजम खान ने साथियों से हिम्मत बनाए रखने और आपस में मतभेद न रखने की बात कही. उन्होंने अपने समर्थकों से रामपुर में शांति और सुरक्षा बनाए रखने की जिम्मेदारी निभाने को भी कहा. काशिफ ने बताया कि जेल जाते समय भी आजम खान को अपने शहर और वहां के लोगों की चिंता थी.

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