Raebareli Monsoon Alert: जुलाई का आधा महीना बीत चुका है, लेकिन रायबरेली में मानसून की बेरुखी थमने का नाम नहीं ले रही है. अषाढ़ के इस मौसम में रिमझिम फुहारों के बजाय आसमान से बरस रही धूप और हवा में घुली भीषण उमस ने आम जनजीवन को पूरी तरह हलकान कर दिया है. शुक्रवार को सुबह से ही चिपचिपी गर्मी का ऐसा दौर शुरू हुआ कि लोग पसीने-पसीने हो गए.
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धोखा दे रहे कूलर-पंखे, अघोषित कटौती ने छीना रातों का चैन
भीषण उमस के आगे घरों में लगे पंखे और कूलर पूरी तरह फेल साबित हो रहे हैं. कूलर की हवा उमस को और बढ़ा रही है, जिससे लोग घरों के भीतर भी बेचैन हैं. वहीं, इस भीषण गर्मी के बीच बिजली विभाग की अघोषित कटौती और बार-बार की ट्रिपिंग ने आग में घी का काम किया है. दिन में उमस और रात में बिजली की आंख-मिचौली से लोगों की रातों की नींद उड़ चुकी है. दोपहर होते ही बाजारों में सन्नाटा पसर जाता है.
जेब पर भारी पड़ रही धान की रोपाई, लागत बढ़ने से सहमा किसान
दूसरी तरफ, मानसूनी बारिश न होने से जिले का अन्नदाता सबसे बड़े संकट से जूझ रहा है. धान की रोपाई के लिए यह समय बेहद नाजुक है, लेकिन आसमान में बादलों की केवल आवाजाही देखकर किसानों की उम्मीदें दम तोड़ रही हैं. हार मानकर अब जिले के किसान अपने खर्च पर डीजल पंप सेट चलाकर खेतों को सींचने और धान की रोपाई करने को मजबूर हैं.
किसानों का कहना है कि डीजल के लगातार बढ़ते दामों के कारण सिंचाई का खर्च दोगुना से ज्यादा हो गया है. अगर यही हाल रहा, तो इस बार धान की फसल में लागत निकालना भी नामुमकिन हो जाएगा.
मौसम विभाग के अनुसार, जब तक तेज मानसूनी हवाओं के साथ झमाझम बारिश नहीं होती, तब तक इस चिपचिपी गर्मी और उमस से राहत मिलने की उम्मीद नहीं है. तब तक के लिए रायबरेली की जनता को तपिश और किसानों को महंगे डीजल के भरोसे ही दिन काटने होंगे.
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