Raebareli News: भीषण गर्मी और चढ़ते पारे के बीच अब महंगाई ने आम आदमी की कमर तोड़नी शुरू कर दी है. पहले से ही महंगी दालों की मार झेल रहे गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए अब हरी सब्जियां भी पहुंच से दूर होती जा रही हैं. बाजार में हरी सब्जियों के दामों में आए अचानक उछाल से गृहणियों के चेहरे मुरझा गए हैं. आलू, प्याज से लेकर टमाटर और हरी मिर्च तक की कीमतें आसमान छू रही हैं, जिससे रसोई का पूरा बजट चरमरा गया है. हालत यह है कि लोगों की थाली से हरी सब्जियां और सलाद धीरे-धीरे गायब होने लगे हैं.
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थाली से गायब हुआ जायका, गृहणियां परेशान
गर्मी बढ़ने के साथ ही मंडियों में सब्जियों की आवक कम हुई है, जिसका सीधा असर फुटकर कीमतों पर देखने को मिल रहा है. मध्यम वर्गीय परिवारों की महिलाओं के सामने संकट खड़ा हो गया है कि आखिर घर का खर्च कैसे चलाया जाए और किन चीजों में कटौती की जाए. जो टमाटर और हरी मिर्च पहले खाने का जायका बढ़ाते थे, अब उनके भाव सुनकर ही लोग कदम पीछे खींच रहे हैं. मध्यम वर्ग के लोग अब सिर्फ उतनी ही सब्जी खरीद रहे हैं जिससे किसी तरह काम चल सके.
गरीबों की थाली से दूर हुई सब्जियां
सब्जियों के बढ़े दामों ने सबसे ज्यादा चोट दिहाड़ी मजदूरों और गरीब तबके पर की है. स्थानीय लोगों का कहना है कि दालें तो पहले से ही बजट से बाहर थीं, अब हरी सब्जियां खरीदना भी बड़ी चुनौती बन गया है. सलाद के नाम पर मिलने वाली खीरा-ककड़ी और प्याज की कीमतें भी आम आदमी की जेब पर भारी पड़ रही हैं.
आवक घटने और गर्मी को माना जा रहा मुख्य कारण
स्थानीय सब्जी विक्रेताओं के अनुसार, इस बार पड़ी रिकॉर्ड तोड़ गर्मी और समय पर लोकल फसलों की आपूर्ति न होने के कारण बाहर से आने वाली सब्जियों पर निर्भरता बढ़ गई है. भाड़े में बढ़ोतरी और भीषण गर्मी में सब्जियों के सड़ने के डर से थोक व्यापारी भी सीमित माल मंगा रहे हैं, जिससे बाजार में मांग के मुकाबले आपूर्ति बेहद कम है. व्यापारियों का मानना है कि जब तक मौसम में नरमी नहीं आती, तब तक दामों में राहत मिलने की उम्मीद कम ही है.
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