Raebareli Weather today 7th July 2026: आषाढ़ का महीना शुरू हो चुका है, लेकिन जिले में मानसून की बेरुखी ने अन्नदाता के माथे पर चिंता की लकीरें खींच दी हैं. अमूमन आषाढ़ की शुरुआत होते ही जिले के खेतों में धान की रोपाई की हलचल तेज हो जाती थी, लेकिन इस बार आसमान में बादलों की आवाजाही के बीच भी धरती प्यासी है. बारिश न होने के कारण खेतों में नमी गायब है, जिससे धान की रोपाई का काम पूरी तरह ठप पड़ा है. कई इलाकों में खेत सूखे और फटे नजर आ रहे हैं.
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महंगी सिंचाई के भरोसे संपन्न किसान, छोटे काश्तकार परेशान
बारिश न होने से सबसे ज्यादा मार छोटे और सीमांत किसानों पर पड़ रही है. जिन किसानों के पास निजी बोरिंग, ट्यूबवेल या सबमर्सिबल पंप जैसे साधन हैं, वे भारी-भरकम रकम खर्च कर किसी तरह खेतों में पानी भरकर रोपाई का काम चला रहे हैं. लेकिन डीजल और बिजली की बढ़ती लागत के कारण यह सिंचाई बेहद महंगी साबित हो रही है. वहीं, साधनविहीन छोटे किसान पूरी तरह से केवल कुदरत के भरोसे बैठे हैं और टकटकी लगाए बारिश का इंतजार कर रहे हैं.
धान की नर्सरी भी हुई प्रभावित
सूखे के इस संकट ने केवल रोपाई ही नहीं, बल्कि धान की नर्सरी (बेहन) को भी अपनी चपेट में ले लिया है। मिट्टी में पर्याप्त नमी न होने के कारण कई गांवों में किसान अभी तक ठीक से नर्सरी भी तैयार नहीं कर पाए हैं. भीषण गर्मी और तेज उमस के कारण तैयार हो रही पौध भी झुलसने की कगार पर है. आम जनमानस भी इस उमस भरी गर्मी से बेहाल है.
विशेषज्ञों की राय और आर्थिक संकट का डर
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि खरीफ की फसलों (विशेषकर धान) के बेहतर उत्पादन के लिए समय पर मानसून का सक्रिय होना बेहद अनिवार्य है. यदि रोपाई में ज्यादा देरी होती है, तो इसका सीधा असर फसल के चक्र और उसके अंतिम उत्पादन (Yield) पर पड़ेगा.
आर्थिक मोर्चे पर झटका
किसानों का कहना है कि खेती में पहले ही लागत बढ़ चुकी है. अगर अगले कुछ दिनों के भीतर अच्छी बारिश नहीं हुई, तो धान की रोपाई का समय हाथ से निकल जाएगा. इससे न सिर्फ खरीफ की फसलों को भारी नुकसान पहुंचेगा, बल्कि पैदावार घटने से किसानों की आर्थिक स्थिति पूरी तरह से डांवाडोल हो जाएगी. फिलहाल, पूरे जिले के किसानों की निगाहें अब केवल आसमान पर टिकी हैं कि कब बदरा बरसें और खेतों में हरियाली लौटे.
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