Raebareli Mandi Bhav Today: रसोई का बजट बिगाड़ रही सब्जियों की महंगाई, रायबरेली में टमाटर-प्याज के दामों में बड़ा उछाल

Newzo

• 10:05 AM • 05 Jul 2026

Raebareli Mandi Bhav 5 July 2026: बदलते मौसम और घटती आवक ने सब्जियों की कीमतों में आग लगा दी है. रायबरेली में टमाटर, प्याज, लहसुन और अदरक के दामों में भारी उछाल से आम लोगों की रसोई का बजट बिगड़ गया है. बाहरी राज्यों पर बढ़ती निर्भरता और महंगा परिवहन फिलहाल राहत की उम्मीद कम दिखा रहे हैं.

रसोई का बजट बिगाड़ रही सब्जियों की महंगाई, रायबरेली में टमाटर-प्याज के दामों में बड़ा उछाल

रसोई का बजट बिगाड़ रही सब्जियों की महंगाई, रायबरेली में टमाटर-प्याज के दामों में बड़ा उछाल

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Raebareli Bhav 5 July 2026: बदलते मौसम की मार अब आम जनता की थाली पर पड़ने लगी है. आसमान छूते सब्जियों के दामों ने आम लोगों की रसोई का बजट पूरी तरह से बिगाड़ कर रख दिया है. महज 15 दिनों के भीतर टमाटर की कीमतें दोगुनी हो चुकी हैं, वहीं अदरक, प्याज और लहसुन के दामों में आई भारी तेजी ने निम्न व मध्यम वर्गीय परिवारों की चिंता बढ़ा दी है. गर्मी और असमय बारिश के कारण फसलों की कम आवक को इस बेतहाशा महंगाई की मुख्य वजह माना जा रहा है.

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15 दिन में दोगुने हुए टमाटर के दाम, प्याज-लहसुन भी हुए लाल*

मंडी में स्थानीय फसलों का उत्पादन बंद होने से सब्जियों की किल्लत शुरू हो गई है, जो टमाटर 15 दिन पहले तक 30 रुपये प्रति किलो बिक रहा था, वह अब बढ़कर 60 रुपये प्रति किलो पर पहुंच गया है. इसके अलावा रसोई का मुख्य हिस्सा माने जाने वाले प्याज और लहसुन भी आम आदमी की पहुंच से दूर होते जा रहे हैं. प्याज के दाम भी 25-30 रुपये प्रति किलो से बढ़कर अब 40 रुपये प्रति किलो पहुंच गए हैं. लहसुन के दाम में भी 50 रुपये प्रति किलो की बढ़ोतरी हुई है. इसके बाद अब दाम 200 रुपये किलो पहुंच गए हैं.वहीं अदरक के दामों में भी उछाल आया है. 160 रुपये किलो मिलने वाला अदरक अब 280 रुपये किलो मिल रहा है.

पहाड़ी क्षेत्रों और अन्य राज्यों से हो रही आपूर्ति

स्थानीय आवक पूरी तरह ठप होने के कारण अब जिले की मंडी बाहरीराज्यों और पहाड़ी क्षेत्रों पर निर्भर हो गई है. सब्जी विक्रेता रोहित ने बताया कि भीषण गर्मी के चलते टमाटर और प्याज का पुराना स्टॉक खराब हो चुका है. वर्तमान में प्याज की आपूर्ति नासिक (महाराष्ट्र) व मध्य प्रदेश से हो रही है, जबकि टमाटर पहाड़ी इलाकों से मंगाया जा रहा है. वहीं, लहसुन की आवक मध्य प्रदेश और पंजाब से बनी हुई है. बाहरी क्षेत्रों से आने के कारण परिवहन लागत बढ़ने का असर भी कीमतों पर साफ दिख रहा है.

अभी राहत के आसार नहीं

व्यापारियों का कहना है कि हर साल इस मौसम (गर्मी और बारिश के संधिकाल) में फसलों की आवक कम होने से दाम बढ़ते हैं. जानकारों की मानें तो आगामी कुछ दिनों तक स्थानीय स्तर पर नई फसल आने की कोई उम्मीद नहीं है, जिससे साफ है कि आने वाले दिनों में भी जनता को सब्जियों की इन तीखी कीमतों से राहत मिलने की संभावना बेहद कम है.