Raebareli News: रायबरेली में कूड़े के ढेर में मिले सैकड़ों आधार कार्ड, सरकारी लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग तेज

Newzo

• 02:13 PM • 03 Jul 2026

Raebareli Aadhaar Cards News: रायबरेली में कूड़े के ढेर में सैकड़ों आधार कार्ड मिलते ही सिस्टम की पोल खुल गई. लोगों की पहचान सड़क पर बिखरी देख आक्रोश भड़क उठा. जांच शुरू हुई, लेकिन सवाल वही है—क्या यह लापरवाही थी या साजिश? जवाब अभी भी धुंध में है, और जिम्मेदार खामोश खड़े हैं.

रायबरेली में कूड़े के ढेर में मिले सैकड़ों आधार कार्ड, सरकारी लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग तेज

रायबरेली में कूड़े के ढेर में मिले सैकड़ों आधार कार्ड, सरकारी लापरवाही पर उठे गंभीर सवाल, जांच की मांग तेज

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Raebareli Aadhaar Cards News: यूपी के रायबरेली से एक ऐसी सनसनीखेज खबर सामने आई है, जिसने सरकारी सिस्टम की मुस्तैदी और दावों की धज्जियां उड़ा कर रख दी हैं. शहर के सबसे व्यस्त और अतिसुरक्षित माने जाने वाले तहसील गेट के ठीक सामने उस वक्त हड़कंप मच गया, जब लोगों की नजर कूड़े के ढेर पर पड़ी. कूड़े के इस ढेर में कोई साधारण कचरा नहीं, बल्कि आम जनता की 'पहचान' यानी सैकड़ों की संख्या में असली आधार कार्ड लावारिस हालत में सड़ रहे थे. इस महालापरवाही की खबर जंगल में आग की तरह फैल गई और देखते ही देखते मौके पर भारी भीड़ जमा हो गई.

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कूड़े में बिखरी जनता की 'गोपनीयता', साथ में मिले फाइनेंस के दस्तावेज

हैरानी की बात यह है कि कूड़े के ढेर में सिर्फ आधार कार्ड ही नहीं, बल्कि भारी संख्या में फाइनेंस से जुड़े जरूरी कागजात और अन्य गोपनीय दस्तावेज भी बिखरे पड़े मिले. स्थानीय लोगों के मुताबिक, ये तमाम आधार कार्ड राही ब्लॉक के रहने वाले ग्रामीणों के हैं. डिजिटल इंडिया के इस दौर में, जहां आधार कार्ड के बिना इंसान का राशन से लेकर बैंक खाता तक बंद हो जाता है, वहां सैकड़ों जरूरतमंदों के ये जरूरी दस्तावेज कचरे के डिब्बे की शोभा बढ़ा रहे थे.

सरकार कहती है कि आधार के बिना पत्ता भी नहीं हिलता, लेकिन रायबरेली में उसी आधार को सिस्टम ने कचरा समझकर फेंक दिया. आखिर इन गरीबों की गोपनीयता और सुरक्षा के साथ खिलवाड़ करने का हक इस सिस्टम को किसने दिया?

एक तरफ ग्रामीण अपने आधार कार्ड बनवाने और उन्हें पाने के लिए महीनों डाकखाने और सरकारी दफ्तरों के चक्कर काट-काटकर चप्पलें घिस रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारियों की नाक के नीचे इन कार्ड्स को रद्दी के भाव फेंक दिया गया. इस घटना ने डाक विभाग और स्थानीय प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवालिया निशान खड़े कर दिए हैं. जनता तक जो कार्ड सुरक्षित पहुंचने चाहिए थे, वे तहसील के मुख्य द्वार के सामने ही सिस्टम की पोल खोल रहे हैं.

सैकड़ों आधार कार्ड का इस तरह सरेआम कूड़े में मिलना महकमे की एक बहुत बड़ी चूक और संवेदनहीनता को दर्शाता है. जनता में इस बात को लेकर भारी आक्रोश है. अब सवाल यह उठता है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में आधार कार्ड तहसील गेट तक कैसे पहुंचे? क्या इन्हें जानबूझकर यहां फेंका गया या यह किसी बड़ी साजिश का हिस्सा है? जनता के भरोसे का कत्ल करने वाले इस महालापरवाही के असली जिम्मेदार पर कब और क्या कार्रवाई होगी?

फिलहाल, इस मामले के सामने आने के बाद प्रशासनिक गलियारों में हड़कंप मचा हुआ है और हर कोई अपनी गर्दन बचाने में जुटा है. देखना होगा कि इस मामले में गाज किस पर गिरती है.