Raebareli government school controversy: प्रदेश सरकार एक तरफ 'पढ़ेगा इंडिया तो बढ़ेगा इंडिया' का नारा बुलंद कर रही है, वहीं रायबरेली के शिक्षा विभाग ने इस नारे की धज्जियां उड़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी है. महाराजगंज क्षेत्र से शिक्षा विभाग की घोर लापरवाही का एक ऐसा वीडियो सामने आया है, जिसने विभाग की कार्यशैली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.
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कूड़े के भाव मिलीं 'मुफ्त' की किताबें
मामला महाराजगंज स्थित कंपोजिट विद्यालय जमुरांवा का है. यहाँ बच्चों को बांटी जाने वाली बेशकीमती सरकारी किताबें स्कूल के मुख्य गेट पर लावारिस हालत में पड़ी मिलीं. ताज्जुब की बात यह है कि जिन किताबों को बच्चों के हाथों में होना चाहिए था, वे धूल फांक रही हैं और बारिश व गंदगी की भेंट चढ़ रही हैं.
वीडियो वायरल होते ही मचा हड़कंप
सोशल मीडिया पर किताबों की बर्बादी का वीडियो जैसे ही जंगल की आग की तरह फैला, शिक्षा विभाग में हड़कंप मच गया. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि किस तरह सरकारी धन का दुरुपयोग किया जा रहा है. मुफ्त वितरण के लिए आई इन किताबों के इस 'बुरे हाल' को देखकर ग्रामीणों का गुस्सा सातवें आसमान पर है.
ग्रामीणों में भारी आक्रोश
स्थानीय ग्रामीणों ने स्कूल प्रशासन और विभाग के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है. ग्रामीणों का कहना है कि
एक तरफ गरीब बच्चे किताबों के लिए तरस रहे हैं. दूसरी तरफ जिम्मेदार अधिकारी सो रहे हैं. सरकारी बजट की इस तरह बर्बादी बर्दाश्त नहीं की जाएगी. यह सीधे तौर पर बच्चों के हक पर डाका है. जब किताबें गेट पर ही फेंकनी थीं, तो विभाग ने वितरण का ढोंग क्यों किया?
जांच के घेरे में जिम्मेदार
वीडियो वायरल होने के बाद अब कयास लगाए जा रहे हैं कि गाज गिरना तय है. सवाल यह उठता है कि क्या स्कूल के प्रधानाध्यापक और खंड शिक्षा अधिकारी को इस लापरवाही की भनक नहीं थी? या फिर सब कुछ जानबूझकर किया गया? फिलहाल, इस मामले ने पूरे जिले के शिक्षा विभाग को कटघरे में खड़ा कर दिया है.
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