Raebareli News: अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) रायबरेली के यूरोलॉजी विभाग ने चिकित्सा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है.विभाग के डॉक्टरों ने 20 वर्षों से किडनी स्टोन की समस्या से जूझ रहे एक मरीज की जटिल और दुर्लभ लैप्रोस्कोपिक सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया है. लंबे समय से गलत निदान और बार-बार होने वाले संक्रमण के कारण मरीज की किडनियां जवाब देने की कगार पर थीं, जिसे एम्स के विशेषज्ञों ने समय रहते बचा लिया.
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दो दशक का संघर्ष और विफल उपचार
मरीज पिछले 20 सालों से पथरी के दर्द से कराह रहा था. उसने प्रयागराज के कई बड़े सरकारी संस्थानों और निजी यूरोलॉजिस्टों से इलाज कराया. वर्ष 2004 और 2014 में ESWL पद्धति से पथरी निकाली गई, लेकिन समस्या जड़ से खत्म नहीं हुई. साल 2024 तक आते-आते हालत यह हो गई कि मरीज को हर 6 महीने में स्टेंट बदलवाने की सलाह दी गई. बार-बार होने वाली लिथोट्रिप्सी और स्टेंटिंग की प्रक्रियाओं से मरीज शारीरिक और आर्थिक रूप से टूट चुका था.
डॉ. अमित मिश्रा ने पकड़ा मर्ज: 'संकुचन' बना था बाधा
जब थक-हारकर मरीज एम्स रायबरेली पहुँचा, तो यूरोलॉजिस्ट डॉ. अमित मिश्रा ने विस्तृत जांच के बाद असली समस्या का पता लगाया. जांच में सामने आया कि बार-बार पथरी बनने और इन्फेक्शन के कारण मरीज की मूत्रवाहिनी (Ureter) में संकुचन (Stricture) हो गया था. इसी वजह से पथरी और पेशाब का रास्ता बार-बार अवरुद्ध हो रहा था और बैकप्रेशर के कारण किडनियां डैमेज हो रही थीं. मरीज की दाईं किडनी 70% और बाईं किडनी 40% तक प्रभावित हो चुकी थी.
6 मिमी की नली पर जटिल सर्जरी
डॉक्टरों ने लैप्रोस्कोपिक यूरेटेरो-यूरेटेरोस्टॉमी करने का फैसला लिया. यह एक बेहद चुनौतीपूर्ण प्रक्रिया थी क्योंकि मात्र 6 मिमी व्यास की मूत्रवाहिनी के संकुचित हिस्से को काटकर स्वस्थ सिरों को जोड़ना था. डॉ. अमित मिश्रा और एनेस्थेटिस्ट डॉ. अभय राज की टीम ने इस सूक्ष्म सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया. डॉ अमित मिश्रा ने बताया कि यदि सही समय पर सटीक निदान न होता, तो कम उम्र में ही मरीज की दोनों किडनियां फेल हो सकती थीं. लैप्रोस्कोपिक तकनीक से अब मरीज को न तो बार-बार स्टेंट की जरूरत पड़ेगी और न ही बड़े चीरे का निशान रहेगा.
ये रहे टीम के हीरो
सफल ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. अमित मिश्रा, डॉ. अभय राज, डॉ. उत्सव, डॉ. मयंक और ओटी स्टाफ श्री कृष्णा, जयपाल व लक्ष्मी शामिल रहे. वार्ड में देखभाल की कमान सीनियर नर्सिंग ऑफिसर सुश्री नम्रता, सुमंत, एकता और उनकी टीम ने संभाली.
संस्थान की कार्यकारी निदेशक प्रो. डॉ. अमिता जैन ने इस सफलता पर डॉक्टरों की टीम को बधाई दी है. वर्तमान में मरीज पूरी तरह स्वस्थ है और एम्स की ओपीडी में नियमित फॉलो-अप ले रहा है.
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